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Jamshedpur News : संसाधन रहते हुए इलाज बदहाल! एमजीएम के निरीक्षण ने उठाए राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल : MGM Hospital Inspection

by Rakesh Pandey
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MGM Hospital Jamshedpur : जमशेदपुर : देश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के दावों के बीच जमीनी हकीकत क्या है, इसका ताजा उदाहरण महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देखने को मिला। इलाज की सुविधाओं के विस्तार और पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) सीटों में बढ़ोतरी की तैयारियों को परखने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय टीम के निरीक्षण में कई बुनियादी खामियां उजागर हुईं। यह स्थिति न सिर्फ एक अस्पताल की कहानी है, बल्कि देशभर के सरकारी मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में मौजूद व्यवस्थागत चुनौतियों की ओर भी इशारा करती है।

इमरजेंसी से ओटी तक अव्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव ललित नारायण शुक्ला, चिकित्सा निदेशक डॉ. एस. सरकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सबसे पहले इमरजेंसी, ओपीडी, वार्ड और ऑपरेशन थियेटर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी विभाग की अव्यवस्थित स्थिति पर अधिकारियों ने नाराज़गी जताई। लिफ्ट में लिफ्टमैन की नियमित तैनाती न होना, पुराने व अनुपयोगी उपकरणों का उपयोग और ऑपरेशन थियेटर के बाहर मरीजों व परिजनों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था का अभाव सामने आया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इतने बड़े और संसाधनयुक्त अस्पताल में ऐसी मूलभूत कमियां चिंताजनक हैं।

बेहतर भवन, कमजोर प्रबंधन

निरीक्षण के बाद हुई बैठक में संयुक्त सचिव ने प्राचार्य, उपाधीक्षक और सभी विभागाध्यक्षों से सीधे सवाल किए। उन्होंने पूछा कि जब अस्पताल के पास आधुनिक भवन, पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी चिकित्सक मौजूद हैं, तो फिर संचालन बेहतर क्यों नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों का कहना था कि निजी अस्पतालों की तुलना में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के पास संसाधन कम नहीं है, इसके बावजूद अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।

दवाओं को लेकर उठे गंभीर सवाल

बैठक में दवाओं के मुद्दे पर भी सवाल उठे। संयुक्त सचिव ने पूछा कि यदि अस्पताल में बाहर की दवाएं नहीं लिखी जा रही हैं, तो फिर अस्पताल के बाहर दवा दुकानों पर इतनी भीड़ क्यों रहती है। इसे गंभीर जांच का विषय बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकारी फंड खर्च न होने पर नाराजगी

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सरकार प्रत्येक विभागाध्यक्ष को विकास कार्यों के लिए पांच-पांच लाख रुपये उपलब्ध करा रही है। इसके बावजूद राशि खर्च न होने पर संयुक्त सचिव ने नाराज़गी जताई और सवाल किया कि जब फंड उपलब्ध है तो कार्यों में देरी क्यों हो रही है। यह स्थिति सरकारी स्वास्थ्य बजट के जमीनी स्तर पर उपयोग को लेकर राष्ट्रीय बहस को भी जन्म देती है।

सुपर स्पेशलिटी सेवाओं पर जोर

निरीक्षण में हार्ट, न्यूरो, कैंसर और प्लास्टिक सर्जरी जैसी सुपर स्पेशलिटी यूनिट पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इन विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति हो चुकी है। संयुक्त सचिव ने निर्देश दिया कि सभी यूनिट को प्राथमिकता के आधार पर जल्द शुरू किया जाए, ताकि गंभीर मरीजों को बड़े शहरों की ओर रुख न करना पड़े।

कैथ लैब की देरी और आगे की राह

कैथ लैब के निरीक्षण में अंदरूनी कार्य अधूरा पाया गया। इस पर भवन निर्माण विभाग को निर्देश दिया गया कि रांची स्थित रिम्स के हृदय रोग विशेषज्ञों से समन्वय कर शीघ्र डीपीआर तैयार की जाए, ताकि कैथ लैब को जल्द चालू किया जा सके। कुल मिलाकर, एमजीएम का यह निरीक्षण सिर्फ एक संस्थान की समीक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था के उस पहलू को उजागर करता है, जहां संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद कमजोर प्रबंधन और क्रियान्वयन मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

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