JAMSHEDPUR : सरकारी सहायता प्राप्त करीमिया मुस्लिम स्कूल में सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा लिया गया है। जानकारी के अनुसार, विद्यालय प्रबंधन समिति ने कक्षा 1 से 5 एवं कक्षा 6 के लिए कुल तीन स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य पदों पर नियुक्ति हेतु 28 फरवरी 2026 को एक विज्ञापन प्रकाशित किया था। हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरते जाने के आरोप सामने आए हैं। विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक शहनाज बेगम समेत कई अभ्यर्थियों ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल नहीं किया गया और विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया।
इन शिकायतों के मद्देनजर जिला शिक्षा अधीक्षक ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही विद्यालय प्रबंधन से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है। इनमें विद्यालय की भूमि संबंधी कागजात, भवन की स्थिति, पेयजल एवं खेल मैदान की सुविधा, आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या तथा परीक्षा से वंचित अभ्यर्थियों की सूची और कारण शामिल हैं। नियुक्ति प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगाने के साथ ही विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नियुक्ति के लिए साक्षात्कार के दौरान होता रहा हंगामा
मानगो के वारिस नगर स्थित सरकारी सहायता प्राप्त करीमिया मुस्लिम स्कूल में शिक्षकों के 6 पदों पर नियुक्ति के लिए मंगलवार को अभ्यर्थियों का साक्षात्कार आयोजित किया गया। लेकिन, शुरू से अंत तक साक्षात्कार की प्रक्रिया को लेकर स्कूल के बाहर कुछ अभ्यर्थी हंगामा करते रहे। इस नियुक्ति के लिए 250 से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। लेकिन, इंटरव्यू के लिए सिर्फ 141 को शॉर्टलिस्ट किया गया था। वहीं जिन अभ्यर्थियों को इंटरव्यू की प्रक्रिया से बाहर रखा गया था, वे भी स्कूल पहुंच गए थे। उनका कहना था कि बिना कोई सूचना दिए व आधार बताए ही उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। जबकि विज्ञापन में नियुक्ति के लिए जो योग्यता दी गयी थी, उसे वे फुल-फील करते हैं।
स्कूल में हंगाम करने के बाद अभ्यर्थी डीसी कार्यालय व शिक्षा विभाग पहुंचे और वहां भी नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली की शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन ने पहले ही पैसा लेकर चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को तय कर लिया है और सिर्फ दिखावे के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। मालूम हो कि इस स्कूल पर नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली के साथ ही बिना शिक्षा विभाग की जानकारी के स्कूल को भालूबासा से मानगो शिफ्ट करने का भी आरोप है। इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग भी सवालों के घेरे में हैं। उसके अधिकारियों पर भी प्रबंधन के साथ मिलीभगत का आरोप लग रहा है।
नियुक्ति के लिए 18 से 20 लाख रुपये लेने का आरोप
स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर बाहरी अभ्यर्थियों के साथ ही स्कूल में छह से सात साल तक पढ़ा चुके शिक्षकों ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले ही कुछ अभ्यर्थियों से 18 से 20 लाख रुपये में नियुक्ति का सौदा प्रबंधन कर चुका है। यही वजह है कि इस पूरी प्रक्रिया को सिर्फ दिखावे के लिए किया जा रहा है। यहां तक कि जो अभ्यर्थी स्थानीय स्कूल में पढ़ा चुके हैं, उन्हें ही साक्षात्कार की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। अभ्यर्थियों की मानें तो साक्षात्कार के लिए सूची निर्धारित समय से एक घंटा पहले जारी की गयी है, जबकि नियमत: कम से कम एक दिन पहले इसे जारी करनी होती है।
भाजपा ने भी डीसी से रखी थी जांच की मांग
जिला भाजपा ने भी करीमिया मुस्लिम स्कूल में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया की जांच कराने की मांग डीसी से करते हुए इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। भाजपा जिला मीडिया सह प्रभारी अखिलेश सिंह ने कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, स्कूल के नाम पर रिश्वत लेकर शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। बताया गया कि पहले यह विद्यालय भालूबासा में बंद हो चुका था, लेकिन बाद में कथित मिलीभगत से इसका पता बदलकर मानगो में संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि जिस जमीन पर स्कूल चल रहा है, उसके कागजात भी समिति के नाम पर नहीं हैं और न ही प्राथमिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से अनुमति ली गई है। शिकायतकर्ता ने जांच कर फर्जी नियुक्तियों पर रोक और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

