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Money laundering case: एनसीपी नेता छगन भुजबल की जमानत के खिलाफ ईडी की याचिका खारिज

बॉम्बे हाई कोर्ट ने चार मई 2018 को भुजबल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दी थी। ईडी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया और सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाया।

by Reeta Rai Sagar
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सेंट्रल डेस्क: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को एक पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहत दे दी है। शीर्ष अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उन्हें मिली जमानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।

2018 में रिहा किया गया था याचिकाकर्ता
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने इस मामले में भुजबल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को 2018 में जमानत पर रिहा किया गया था और वर्तमान में उनकी गिरफ्तारी की अवैधता पर जाना आवश्यक नहीं है।

कोर्ट ने कहा-हस्तक्षेप का नहीं बनता कोई मामला
“जमानत देने वाला आदेश साल 2018 में पारित किए गए थे। अतः संविधान के अनुच्छेद 136 के अंतर्गत इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं बनता है। एसएलपी को खारिज किया जाता है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने चार मई 2018 को भुजबल को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जमानत दे दी थी। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री को ईडी की जांच में पता चला था कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया और सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाया।

ईडी ने भुजबल पर लगाया था गलत तरीके से ठेके देने का आरोप
ईडी के अनुसार, भुजबल ने अपने और अपने परिवार के लिए रिश्वत के बदले में नई दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण सहित विकास कार्यों से संबंधित ठेके एक विशेष फर्म को दिए थे। केंद्रीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि भुजबल और उनके भतीजे समीर भुजबल अपने स्वामित्व वाली अवैध कंपनियों में इस तरह का धन पहुंचाते थे।

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