CAA Hearing : नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नागरिकता संशोधन नियम 2024 पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। CAA के खिलाफ 237 याचिका दायर की गई है। इनमें 20 याचिकामें कानून पर रोक लगाने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। इसमें CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं।
CAA Hearing: 11 मार्च को जारी किया गया था सीएए का नोटिफिकेशन
मामले को लेकर 19 मार्च को पिछली सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने सरकार से 3 हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। बेंच ने कहा था, केंद्र सरकार 8 अप्रैल तक एफिडेविट दाखिल करे। वहीं केंद्र ने 11 मार्च को सीएए का नोटिफिकेशन जारी किया था। तब से ये पूरे देश में लागू हो गया। इससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। ऐसे में इस कानून को रोकने के लिए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी याचिका लगाई है।
नागरिकता पाने के लिए क्या करना होगा
सरकार ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया है। आवेदकों को वह साल बताना होगा, जब उन्होंने दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया था। उन्हें ये साबित करना होगा कि वे पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश के निवासी हैं। इसके लिए वहां के पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, मार्कशीट या वहां की सरकार से जारी पहचान का कोई प्रमाण पत्र पेश करना होगा। नागरिकता के आवेदनों पर एक समिति फैसला लेगी। इस समिति में जनगणना निदेशक, IB, फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस, पोस्ट ऑफिस और राज्य सूचना अधिकारी शामिल होंगे। सबसे पहले आवेदन जिला कमेटी के पास जाएगा। फिर उसे एंपावर्ड कमेटी को भेजा जाएगा।
CAA में मुस्लिमों को क्यों नहीं शामिल किया गया?
बीजेपी ने कहा कि केंद्र सरकार CAA के माध्यम से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रभावित अल्पसंख्यक समुदायों को राहत देना चाहती है। मुस्लिम समुदाय इन देशों में अल्पसंख्यक नहीं, बल्कि बहुसंख्यक है। यही कारण है कि उन्हें CAA में शामिल नहीं किया गया है।
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