
रांची: झारखंड के चर्चित तेतरियाखाड़ कोलियरी कांड की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अपराधियों ने एक और बड़े हमले की तैयारी शुरू कर दी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत के सामने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिससे पता चलता है कि अमन साहू और सुजीत सिन्हा (दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं) का गिरोह सिर्फ एक वारदात को अंजाम देकर रुकने वाला नहीं था। उनका असली मकसद कोहराम मचाकर कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से रंगदारी वसूलना था।
ऐसे रची गई थी पूरी साजिश
एनआईए की जांच के मुताबिक, तेतरियाखाड़ में तांडव मचाने के बाद इस गैंग के गुर्गों ने एक और खूनी खेल की योजना बना ली थी। इसके लिए बाकायदा हथियारों और गोलियों का जखीरा जुटाया गया था। जांच में सामने आया है कि सैफ अंसारी नामक आरोपी को एक कार्बाइन, एक पिस्तौल और भारी मात्रा में गोला-बारूद दिए गए थे। उसे अपने साथियों अजय तुरी और पंकज करमाली के साथ मिलकर इस नए हमले को अंजाम देना था।
हालांकि, इससे पहले कि ये अपराधी अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो पाते, बड़कागांव पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर दी। पुलिस ने हथियारों का यह जखीरा बरामद कर लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
रांची की विशेष एनआईए अदालत ने 16 सितंबर 2026 के अपने आदेश में इन तमाम बातों का विस्तार से जिक्र किया है।
तेतरियाखाड़ में क्या हुआ था
यह पूरा मामला 18 दिसंबर 2020 का है। लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र स्थित तेतरियाखाड़ कोलियरी में उस शाम अचानक अंधाधुंध फायरिंग, आगजनी और बम विस्फोट से इलाका दहल उठा था। कोलियरी के चेकपोस्ट के पास शाम को अपराधियों ने जमकर उत्पात मचाया था। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो उन पर भी गोलियां चलाई गईं। इस खौफनाक वारदात में चार ट्रक और एक मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया गया था, जबकि चार आम नागरिक घायल हो गए थे। मौके से कारतूस, बम के अवशेष और कंपनियों को धमकी देने वाले हाथ से लिखे पर्चे मिले थे।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन जेल के अंदर से किया जा रहा था। जेल की सलाखों के पीछे बैठे सरगना अपने गुर्गों के जरिए सीसीएल, कोयला कारोबारियों, ठेकेदारों और ट्रांसपोर्टरों को लगातार धमका रहे थे ताकि वे अपनी धौंस जमाकर अवैध वसूली कर सकें।
सबूतों के घेरे में आरोपी
एनआईए ने इस पूरे मामले में सिर्फ जुबानी बातें नहीं की हैं, बल्कि अदालत में ठोस सबूत पेश किए हैं। जांच एजेंसी ने गवाहों के बयान, आरोपियों की फोटो पहचान, मोबाइल फोन से निकाले गए डेटा और ऑडियो रिकॉर्डिंग को मुख्य आधार बनाया है। मोबाइल चैट्स और कॉल्स से साफ हुआ कि सैफ अंसारी, अमन साहू, शाहरुख अंसारी और प्रदीप गंझू जैसे लोग लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे और आपराधिक साजिश रच रहे थे।
इस सनसनीखेज मामले में एनआईए अब तक कुल 26 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इन पर हत्या के प्रयास, आगजनी, रंगदारी और कड़े कानून यूएपीए के तहत गंभीर आरोप दर्ज हैं। इस मामले में सुनवाई के दौरान कुल 345 गवाहों के नाम शामिल हैं, जो यह बताने के लिए काफी है कि अपराध का यह जाल कितना फैला हुआ था।

