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Jharkhand Teacher Recruitment : 2034 पदों पर भर्ती का पेंच! एकल पीठ के फैसले को जेएसएससी और सरकार ने दी है चुनौती

by Kanchan Kumar
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रांची : ​वर्ष 2016 की ‘स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा’ की बहाली प्रक्रिया से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। अभ्यर्थी मीना कुमारी और अन्य से जुड़े इस चर्चित मामले में मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में अहम मोड़ आया। राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा दायर याचिका (LPA) पर चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष आंशिक सुनवाई पूरी हुई। अदालत ने इस पूरे विषय की गहराई से समीक्षा करने के लिए अगली सुनवाई की तारीख 4 नवंबर तय की है।
​साथ ही, अदालत ने इस मामले से जुड़ी अवमानना याचिका की कार्रवाई पर अगले निर्देश तक रोक को बरकरार रखा है।

​क्या है पूरा मामला और अदालत में किसने क्या तर्क दिए

​इस कानूनी लड़ाई की जड़ में शिक्षकों के खाली रह गए पद और नियुक्ति का तरीका है। अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपने-अपने मजबूत दावे पेश किए।
​ प्रार्थियों के अधिवक्ताओं शेखर प्रसाद गुप्ता, अमृतांश वत्स, शुभम मिश्रा व अन्य ने पूर्व की सुनवाई का हवाला देते हुए कोर्ट को अवगत कराया कि वर्ष 2016 की इस शिक्षक भर्ती में कुल 17,786 पदों का विज्ञापन निकाला गया था। हालांकि, प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी केवल 12,046 पदों पर ही नियुक्तियां हो सकीं और बड़ी संख्या में पद खाली रह गए।

इससे पहले हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अभ्यर्थियों के अभ्यावेदन पर विचार करते हुए योग्यता और तमाम शर्तें पूरी करने वाले 2,034 अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र सौंपने का स्पष्ट आदेश जारी किया था।

​सरकार और जेएसएससी की दलीलें

इस आदेश के खिलाफ सरकार और आयोग ने अपील की। आयोग की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने तर्क दिया कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट के तय निर्देशों के तहत संपन्न कराई गई थी। आयोग का कहना है कि एकल पीठ का फैसला सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के विपरीत है। अब सबकी निगाहें 4 नवंबर को होने वाली वृहत सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि बाकी बचे अभ्यर्थियों का भविष्य किस ओर जाएगा।

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