
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में गड़बड़ी और धांधली के मामले में अदालती शिकंजा कसता जा रहा है। झारखंड हाईकोर्ट ने बहुचर्चित 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के कथित घोटाले के आरोपी सुमन सौरव उर्फ सौरव सुमन को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका और आरोपी के पहले फरार रहने के ट्रैक रिकॉर्ड को आधार बनाते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।
जालसाजी और ओएमआर शीट में हेरफेर का गंभीर आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी पर अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर सोची-समझी साजिश के तहत जालसाजी, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने का संगीन आरोप है। इसके अलावा, झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के उल्लंघन का भी मामला दर्ज है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट के सामने अहम दस्तावेज पेश किए गए।
सरकार ने बताया कि अभ्यर्थी की कार्बन कॉपी और मूल ओएमआर शीट में भारी अंतर पकड़ा गया है। इसके अलावा एडब्ल्यूएस डेटा, बैंक खातों के ट्रांजैक्शन और व्हाट्सएप चैट से यह साफ होता है कि परीक्षा प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर मैनिपुलेट करने में आरोपी की सीधी भूमिका रही है।
साढ़े पंद्रह लाख के लेन-देन का डार्क सीक्रेट
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी के पिता के बैंक खाते से इस मामले के सह-आरोपी पवन कुमार सिंह (जिसे इस खेल का बिचौलिया माना जा रहा है) के खाते में करीब 15 लाख 90 हजार रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ था। सरकार का तर्क है कि इसी तरह की भारी अनियमितताओं के कारण ही 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना पड़ा था।
बचाव पक्ष की दलीलें हुईं खारिज
दूसरी ओर, आरोपी के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। बैंक खातों के लेन-देन से प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित नहीं होती और सिर्फ व्हाट्सएप चैट के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी पिछले साल जुलाई से जेल में है और उसका कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है। हालांकि, अदालत ने तमाम दलीलों को दरकिनार करते हुए आरोपी को राहत देने से साफ इंकार कर दिया।
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