
रामगढ़: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं। यह यात्रा सिर्फ एक बेटे के अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन के प्रति विदाई और शोक के आंसुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड के इतिहास, संस्कृति और भविष्य के विकास का एक बड़ा ब्लूप्रिंट भी तैयार कर रही है। नेमरा गांव अब केवल एक गांव नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन के उद्गम स्थल और दिशोम गुरु शिबू सोरेन व रूपी सोरेन की स्मृतियों का एक जीवंत गलियारा बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है।
पर्यटन के वैश्विक पटल पर उभरेगा नेमरा
मुख्यमंत्री की इस व्यक्तिगत यात्रा के दौरान प्रशासन का पूरा अमला नेमरा में सक्रिय दिखा। झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, नगर विकास सचिव सुनील कुमार, पर्यटन सचिव मुकेश कुमार, अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल और वन विभाग के पीसीसीएफ संजीव कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी पिछले कई दिनों से नेमरा के चप्पे-चप्पे का जायजा ले रहे हैं।
सरकार की मंशा है कि नेमरा के प्राकृतिक संसाधनों-यहां के पहाड़ों, झरनों और हरियाली को सहेजते हुए इसे एक ऐसे ऐतिहासिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जहां देश भर से आने वाले पर्यटक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष और महाजनी प्रथा के खिलाफ उठी शुरुआती आवाज़ के इतिहास से रूबरू हो सकें।
संथाली संस्कृति का अनूठा संगम और उमड़ती भीड़
दिवंगत रूपी सोरेन का श्राद्धकर्म संथाली पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नेमरा में चल रहा है। इस दुखद घड़ी में आदिवासी समाज और संथाली संस्कृति की गहरी एकजुटता देखने को मिल रही है। गिरिडीह के मरांग बुरू संस्थान से जुड़े फागू बेसरा, ग्राम प्रधानों, और कोल्हान-संथाल परगना से आए सैकड़ों लोगों का तांता नेमरा में लगा हुआ है। मुख्यमंत्री जिस सहजता और संवेदनशीलता के साथ पारंपरिक नेग-नियमों का निर्वहन कर रहे हैं, उससे हर कोई भावुक और प्रभावित है। 18 अक्तूबर को होने वाले संस्कार भोज के लिए सीएम हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन खुद दूर-दूर से आ रहे लोगों को आमंत्रण भेज रहे हैं।
दिग्गजों और आमजनों का तांता, दुख की घड़ी में एकजुट राज्य
नेमरा स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर रूपी सोरेन की तस्वीर पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का तांता लगा हुआ है। राजनीतिक दलों की सीमाओं से परे जाकर पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो, भुनेश्वर मेहता, विधायक प्रदीप यादव, बंधु तिर्की, बन्ना गुप्ता समेत कई दिग्गज नेता, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि लगातार नेमरा पहुंच रहे हैं। इसके अलावा सीएनआइ के बिशप और पादरियों का प्रतिनिधिमंडल भी शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचा।

गम के माहौल में भी नहीं भूली जनता की तकलीफें
इस व्यक्तिगत शोक और व्यस्तता के बीच भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आम जनता और जरूरतमंदों से मिलना नहीं भूले। बुधवार को उन्होंने नेमरा पहुंचे कई दिव्यांगजनों को मौके पर ही सहायता उपलब्ध कराई। अलग-अलग गांवों से अपनी फरियाद लेकर पहुंचे लोगों की समस्याएं उन्होंने खुद सुनीं और अधिकारियों को तुरंत निस्तारण के निर्देश दिए। यह संवेदनशीलता इस बात की गवाही देती है कि एक जननेता अपने परिवार के सबसे कठिन दौर में भी जनता के दर्द से पूरी तरह जुड़ा हुआ है।
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