
- गुरुवार को आदिवासी संगठनों ने गेट पर लिखा वीर बुधु भगत का नाम, रात में किसी ने मिटा डाला, शहीद वीर बुधु भगत का नाम हटाने के विरोध में टायर जलाकर किया सड़क जाम
रांची : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के नाम को लेकर रांची में विवाद बढ़ गया है। राज्य सरकार ने मई 2025 में इसका नाम बदलकर शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने का फैसला लिया था। लेकिन करीब डेढ़ साल बाद भी विश्वविद्यालय पुराने नाम से चल रहा है। इस देरी से नाराज आदिवासी संगठनों ने गुरुवार को विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर नया नाम लिख दिया। देर रात किसी ने इसे मिटा दिया। इसके विरोध में शुक्रवार को आदिवासी छात्र सड़क पर उतर आए। उन्होंने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के सामने टायर जलाकर सड़क जाम कर दी।

गुरुवार को पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में छात्र अधिकार मोर्चा, आदिवासी छात्र संघ और सरना समिति के सदस्य विश्वविद्यालय पहुंचे थे। उन्होंने गेट पर लाल रंग से ‘शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय’ लिख दिया। इस दौरान नारेबाजी भी हुई। संगठनों ने सरकार से कैबिनेट के फैसले को जल्द लागू करने की मांग की।
लेकिन गुरुवार देर रात गेट पर लिखा नाम मिटा दिया गया। इससे छात्र संगठनों में नाराजगी फैल गई। शुक्रवार को बड़ी संख्या में छात्र और आदिवासी संगठनों के सदस्य विरोध जताने पहुंचे। उन्होंने टायर जलाकर सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने नाम मिटाने वालों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वीर बुधु भगत झारखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 1831-32 के कोल विद्रोह का नेतृत्व किया था। वे आदिवासी समाज के संघर्ष और गौरव के प्रतीक हैं। ऐसे शहीद के नाम पर विश्वविद्यालय का नाम रखने का फैसला अब तक लागू नहीं होना दुखद है। गेट पर लिखा नाम मिटाया जाना भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि कैबिनेट के फैसले को लागू नहीं करना प्रशासनिक देरी है। यह झारखंड के शहीदों के सम्मान से जुड़ा मामला है। सरकार को इस पर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में वीर बुधु भगत की प्रतिमा लगाने की मांग भी की है।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एसएन मुंडा ने नाम बदलने से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि नाम बदलने के साथ मार्कशीट, डिग्री, पुराने प्रमाणपत्र और डिजिटल रिकॉर्ड में भी बदलाव करना होगा। ऐसा नहीं होने पर विद्यार्थियों को नौकरी और आगे की पढ़ाई में परेशानी हो सकती है।

क्या है पूरा विवाद?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय पहले रांची कॉलेज के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2017 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू हुई। बाद में इसका नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रखा गया।
8 मई 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसका नाम बदलकर शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने का फैसला लिया गया। इस फैसले का आदिवासी संगठनों ने स्वागत किया था। लेकिन अब तक विश्वविद्यालय का आधिकारिक नाम नहीं बदला है।
इसी देरी के विरोध में गुरुवार को छात्र संगठनों ने मुख्य गेट पर नया नाम लिख दिया। रात में इसे मिटा दिया गया। अब यही घटना विरोध की वजह बन गई है। एक तरफ छात्र संगठन कैबिनेट के फैसले को लागू करने की मांग कर रहे हैं, वहीं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने नाम बदलने के साथ शैक्षणिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड में बदलाव की जरूरत बताई है।
कौन थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। वे शिक्षाविद्, वकील और राजनेता थे। वर्ष 1934 में मात्र 33 वर्ष की उम्र में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने। वे इस पद पर 1938 तक रहे।
आजादी के बाद वे जवाहरलाल नेहरू की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बने। वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की। भारतीय जनसंघ को ही आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक पूर्ववर्ती संगठन माना जाता है। 23 जून 1953 को कश्मीर में हिरासत के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
कौन थे वीर बुधु भगत?
वीर बुधु भगत का जन्म 17 फरवरी 1792 को रांची जिले के सिलागाईं गांव में हुआ था। वे उरांव आदिवासी समुदाय से थे। उन्होंने 1831-32 के कोल विद्रोह का नेतृत्व किया था। यह विद्रोह अंग्रेजी शासन, शोषण और अत्याचार के खिलाफ था।
बुधु भगत ने आदिवासियों को संगठित कर अंग्रेजों और उनके सहयोगियों के खिलाफ संघर्ष किया। वे तीर-धनुष और पारंपरिक हथियारों से लड़ाई लड़ते थे। अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए इनाम भी घोषित किया था। 13 फरवरी 1832 को अंग्रेजी सेना के साथ संघर्ष में उनकी मृत्यु हो गई। झारखंड में उन्हें आदिवासी प्रतिरोध और स्वतंत्रता संघर्ष के प्रमुख नायकों में गिना जाता है।
टाइमलाइन : कॉलेज से विश्वविद्यालय और फिर नाम बदलने का फैसला
• 1926 : रांची में सरकारी इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में संस्थान की शुरुआत।
• 1946 : रांची गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज के रूप में स्नातक स्तर की पढ़ाई शुरू हुई।
• 1949 : संस्थान का नाम रांची कॉलेज रखा गया।
• 2017 : रांची कॉलेज को विश्वविद्यालय में अपग्रेड करने की विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसका नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रखा गया।
• 2018 : संस्थान ने राज्य के एकात्मक विश्वविद्यालय के रूप में काम करना शुरू किया।
• 8 मई 2025 : हेमंत सोरेन कैबिनेट ने नाम बदलकर शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने का फैसला लिया।
• 5 नवंबर 2026 : आदिवासी संगठनों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर नया नाम लिख दिया।
• 6 नवंबर 2026 : गेट से नाम मिटाए जाने के विरोध में आदिवासी छात्र सड़क पर उतरे और जाम किया।

