स्पेशल डेस्क, नई दिल्ली : केंद्र सरकार की पहल की बदौलत भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दोगुनी होने की संभावना नजर आ रही है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता और बढ़ते आकर्षण के पीछे बड़ा कारण है बढ़ता वैश्विक तापमान, बढ़ती ईंधन लागत और देशभर के प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता में गिरावट। इन सभी वजहों ने उपभोक्ताओं को पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की तलाश करने और अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
भारत सरकार की सक्रिय रुचि से इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में वृद्धि हो रही है। देश के इंजीनियरिंग छात्र और पेशेवर युवाओं के लिए वर्ष 2030 तक एक करोड़ नौकरियों केवल इसी क्षेत्र में तैयारी हो सकती हैं।
2030 तक 30 फीसदी ईवी हासिल करने का रखा लक्ष्य
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नीतियों और प्रोत्साहनों को लागू किया है। इसके लिए सरकार ने वर्ष 2030 तक 30 फीसद का लक्ष्य रखा हैं। गौरतलब हो, यह COP26 में पीएम मोदी द्वारा दिए गए “पंचामृत” मंत्र भारत की प्रतिबद्धता को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे। साथ ही साथ भारतीय युवाओं को रोजगार के बड़े अवसर प्रदान करने में भी मददगार साबित हो रहे हैं।
प्रौद्योगिकी के भविष्य के रूप में ‘इलेक्ट्रिक वाहनों’ को बढ़ावा देने के साथ वैश्विक मोटर वाहन परिदृश्य में बड़ा परिवर्तन हो रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के पुर्जे में नवाचार और तकनीकी सफलताएं इसको उत्प्रेरित कर रही हैं। इसलिए भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और इसके इस्तेमाल में तेजी लाना आवश्यक समझा गया है। इसी दिशा में काम करने के लिए अब कई कंपनियां आगे आ रही हैं। यह विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर इस दिशा में काम कर रही हैं।
इसी क्रम में राणा समूह की सहायक कंपनी ‘ERISHA ई-मोबिलिटी’ की बात करें तो इस कंपनी ने हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी के लिए एक जर्मन कंपनी के साथ साझेदारी की है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च किए हैं।
राणा ग्रुप के चेयरमैन डॉ. दर्शन राणा ई मोबिलिटी की यात्रा को आगे बढ़ाने के संबंध में बताते हैं कि उनकी कंपनी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक MoU साइन किया है।
इसके तहत यूपी में एक ई-वी पार्क डेवलप किया जाएगा। वहां उनके ग्रुप के साथ-साथ अन्यों की भी फैक्ट्रियां लगेंगी। कंपोनेंट के वेंडर्स और पार्टनर्स को भी वहीं पर जगह दी जाएगी। इसके अलावा उन्होंने एक अन्य MoU साइन किए जाने के संबंध में भी जानकारी प्रदान की। जिसके तहत गौतमबुद्ध नगर में ई व्हीकल के 100 चार्जिंग हब स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें एक हब में कम से कम 2 से 10 चार्जिंग स्टेशन होंगे।
यह पहले से ही ये एनालिसेस किया हुआ था कि अब भारत में हाइड्रोजन को लाना होगा क्योंकि फॉरेन कंट्रीज इसकी तरफ मूव कर चुकी थीं। दर्शन राणा बताते हैं कि पहले ही जो इंसेंटिव पॉलिसीज आई हैं, उससे पहले ही जर्मन और इटेलियन के साथ पार्टनरशिप चालू की थी। जर्मन के साथ भारत में जेवी कंपनी बना दी है जो ERISHA हाइड्रोजन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर काम करेगी।
2030 तक भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों से तेल आयात में 20 लाख करोड़ रुपये की बचत
कंपनी ने कहा कि भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों का विनिर्माण केंद्र बनाने की भी जरूरत है। इलेक्ट्रिक वाहन प्रणाली में भारत के विकास से 2030 तक अकेले तेल आयात में 20 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।

