RANCHI: राज्य के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। राज्य सरकार ने न केवल रिम्स बल्कि भविष्य में अन्य सरकारी हॉस्पिटलों में भी चरणबद्ध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर काम तेज कर दिया है। इस दिशा में 9 जनवरी को एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी कमिटी की बैठक आयोजित की जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि किडनी मरीजों के लिए बड़ी राहत वाला कदम साबित होगा। स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव ध्रुव प्रसाद ने एक पत्र जारी किया है। जिसके अनुसार यह बैठक 9 जनवरी अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी।
रांची के दो हॉस्पिटल पर किया जा रहा विचार
फिलहाल रांची के दो हॉस्पिटल रिम्स और राज हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस प्रदान किए जाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। यह निर्णय राज्य में आर्गन ट्रांसप्लांट सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति देने से पहले एक तकनीकी समिति का गठन किया जाता है। यह समिति निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में कार्य करती है। समिति संबंधित हॉस्पिटल का स्थल निरीक्षण कर वहां उपलब्ध बुनियादी ढांचे का विस्तृत मूल्यांकन करती है। इसमें नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग की उपलब्धता, प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या, ऑपरेशन थिएटर की सुविधा, आईसीयू, ब्लड बैंक, लैब सर्विस और इंफेक्शन कंट्रोल की व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जाती है।
एडवाइजरी कमिटी लेगी अंतिम निर्णय
निरीक्षण के बाद तकनीकी समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को सौंपती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर एडवाइजरी कमिटी यह तय करती है कि संबंधित हॉस्पिटल किडनी ट्रांसप्लांट के लिए निर्धारित सभी मानकों और अर्हताओं को पूरा करता है या नहीं। यदि हॉस्पिटल मानकों पर खरा उतरता है तो अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतिम निर्णय लेकर किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस जारी किया जाता है। अधिकारियों का मानना है कि रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू होने से झारखंड के सैकड़ों किडनी मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई या अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता है।

