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Russia Moon Mission: पांच दशक बाद रूस ने पूरी की चांद पर पहुंचने की तैयारी, Luna-25 की रवानगी इसी महीने

by Rakesh Pandey
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टेक डेस्क: आजकल भारत के चंद्रयान 3 की चंद्रमा पर लैंडिंग को लेकर नजर बनी हुई है। उधर, भारत के बाद रूस भी चंद्रमा  (Russia Moon Mission) पर अपना मिशन भेजने वाला है। रूस अपना चंद्रयान मिशन लॉन्च करने जा रहा है। आप को बता दें कि, रूस 11 अगस्त को अपने चंद्रयान मिशन लूना-25 को लॉन्च करेगा। रूस करीब पांच दशक (47 साल) बाद चंद्रमा (Russia Moon Mission)पर अपना कोई मिशन भेज रहा है। शुक्रवार को लॉन्च किए जाने वाले इस मिशन के बारे में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने भी पुष्टि की है।

भारत के बाद रूस

भारत के चंद्रयान 3 के साथ ही अंतरिक्ष की तरफ जाने की होड़ मच गई है। सौर मंडल के ग्रहों, चंद्रमा समेत इसकी हर बारीकी को जानने के लिए हर देश बेकरार है। रूस (Russia Moon Mission) भी इन देशों की श्रेणी में आ गया है। 11 अगस्‍त को लूना-25 के साथ ही रूस अंतरिक्ष मिशन में वापसी करने वाला है। करीब पांच दशक के बाद रूस का यह मिशन तब लॉन्‍च हो रहा है जब भारत के चंद्रयान 3 को लॉन्‍च किए हुए कुछ ही हफ्ते हुए हैं।

 

लूना-25 (Luna-25)भी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की योजना

रूस (Russia Moon Mission) का लूना-25 भी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की योजना के साथ रवाना होगा। सन् 1976 के बाद पहले लूना-25 लैंडर के साथ, रूस सोवियत दौर के चंद्र मिशन को फिर से शुरू करने जा रहा है। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि लूना-25 को रूस के पूर्व में वोस्तोचन कॉस्मोड्रोम में सोयुज रॉकेट के जरिए 11 अगस्‍त को लॉन्‍च किया जाएगा।

क्‍यों खास है यह मिशन

लूना-24 से अलग लूना-25 कई मायनों में खास हो सकता है लूना-24 को सन् 1976 में लॉन्च किया गया था। रिटर्न मॉड्यूल ने करीब 170 ग्राम चांद की धूल को हासिल किया था और इसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस पहुंचाया। हालांकि कुछ लोगों को इसकी सफलता पर थोड़ी आशंका है। आरआईए नोवोस्ती के साथ बातचीत में अंतरिक्ष विज्ञानी व्लादिमीर सर्डिन ने अनुमान लगाया कि लूना-25 मिशन की सफलता की संभावना 50 फीसदी है।

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पुतिन का बड़ा चैलेंज

पिछले साल वोस्तोचन कॉस्मोड्रोम में रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने कहा था कि सोवियत संघ ने प्रतिबंधों के बावजूद सन् 1961 में पहले इंसान को अंतरिक्ष में भेजा था। उन्होंने जोर देकर कहा कि मॉस्को मौजूदा पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अपना मून मिशन विकसित करेगा।

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