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साहिबगंज : रेल हादसे में साहिबगंज के दो युवकों की मौत की आशंका

by Rakesh Pandey
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साहिबगंज : ओडिशा के बालेश्वर में हुए रेल हादसे में पुरानी साहिबगंज मुहल्ले के दो युवकों की माैत की आशंका है। उसी ट्रेन से 25 वर्षीय राममोहन चौधरी, 26 वर्षीय भीम चौधरी व अनंत कुमार चौधरी चेन्नई जा रहे थे। सभी एक ही बोगी में थे। हादसे में अनंत चौधरी का पैर टूट गया है। अन्य दोनों का कोई पता नहीं है। वैसे यहां से पहुंचे राममोहन व भीम चौधरी के स्वजनों ने दो शवों की पहचान की है लेकिन प्रशासन ने उसे अब तक उसे सौंपा नहीं है। सोमवार को घटना की जानकारी मिलने पर राजमहल विधायक अनंत ओझा पुरानी साहिबगंज पहुंचे और स्वजनों से मुलाकात की। राममोहन चौधरी के रिश्तेदार भागलपुर निवासी संतोष कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर वे राममोहन चौधरी के पिता कन्हाई चौधरी व ससुर महानंद प्रसाद के साथ बालेश्वर पहुंचे हैं। भीम चौधरी के भाई अर्जुन चौधरी भी उनलोगों के साथ है। उन्होंने बताया कि उनलोगों ने शव की पहचान कर ली है। शव खराब हो गया जिससे पहचान में परेशान हो रही है। विस्तृत जांच पड़ताल की जा रही है। इस वजह से अब तक शव उनलोगों को सौंपा नहीं गया है। गौरतलब हो कि बरहड़वा प्रखंड क्षेत्र की रामनगर पंचायत के बड़तल्ला बसंतपुर गांव निवासी सचिन रमानी के दो पुत्र रामसुंदर रमानी और रामरूप रमानी भी इसी ट्रेन में थे। रविवार की शाम दोनों अपने घर पहुंचे। दोनों भाइयों को घर आने की सूचना पर देखने स्वजनों व गांव के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी के मुंह से एक ही बात निकल रहा था कि भगवान की कृपा से दोनों भाई जिंदा हैं। दोनों भाइयों ने बताया कि गांव में काम नहीं मिलने की वजह से अपने परिवार का भरण पोषण के लिए गुरुवार को केरल जाने के लिए घर से निकले। हावड़ा स्टेशन से कोरोमंडल एक्सप्रेस पर सवार हुए। दाेनों जेनरल बोगी में थे। ओडिशा के बालासोर जिला के बाहानगा बाजार रेलवे स्टेशन के लगभग तीन बजे जोरदार आवाज के साथ ट्रेन में धक्का लगने के साथ ट्रेन पटरी छोड़ पलटने लगी। गाड़ी में कोहराम मच गया। ट्रेन में एक दूसरे पर गिरने लगे। मौत को सामने देख आंख में अंधेरा छाने लगा और देखते ही देखते मौत के मंजर से चारों तरफ कोहराम मच गया। इस दौरान वे लोग कब बेहोश हो गए पता नहीं चला। रामसुंदर ने बताया कि जब मुझे होश आया तो लाश देख कर हम फुट फुट कर रो पड़े और अपने भाई रामरूप को खोजने लगे। लाशों के बीच अपने भाई को खोजते समय लगा कि मेरा भाई अब इस दुनिया में नहीं है। तभी पता चला कि कुछ लोगों का इलाज बगल के अस्पताल में चल रहा। हिम्मत जुटाकर जैसे तैसे वहां पहुंचे। वहां भी रोने बिलखने की आवाज सुन कर कलेजा फटने लगा था । इसी बीच अपने भाई को इलाज कराते देख जान में जान आयी। दोनों भाइयों एक दूसरे को देख रो पड़े। रामरूप के सिर पर और बांया पैर पर चोट है। उधर, मिर्जाचौकी थाना क्षेत्र की महादेववरन पंचायत के गांधीनगर गांव निवासी अखिलेश महतो का 30 वर्षीय पुत्र सोनू कुमार भी उक्त ट्रेन से मिर्ज़ाचौकी घर वापस लौट रहा था। ट्रेन हादसे के बाद से परिवार वालों की युवक से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। अखिलेश महतो ने बताया की सोनू एक माह पूर्व काम की तलाश में बेंगलुरु गया था। अच्छा काम ना मिलने की वजह से कुछ दिन मजदूरी कर मिले पैसे से ट्रेन का जेनरल बोगी का टिकट खरीद वापस लौट रहा था। हादसे वाले दिन सोनू अपने भाई से बात कर ट्रेन में सवार घर वापस लौटने की बात बताई थी। उक्त ट्रेन हादसे की ख़बर सुन स्वजनों में कोहराम मचा है। सभी का रो रो कर बुरा हाल है।

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