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Budget 2025: दिल्ली चुनाव और नई दिल्ली सीट को लेकर अरविंद केजरीवाल के नहले पर सीतारमण का दहला

दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव में मध्यवर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है और इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने मध्यवर्ग को सशक्त करने के लिए कई घोषणाएं की हैं।

by Yugal Kishor
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नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल बढ़ी हुई है और इस बार सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) को एक अप्रत्याशित चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने आम बजट 2025 में कुछ ऐसा ऐलान किया हैं, जिनका असर अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर पड़ सकता है। खासकर, मध्यवर्ग के लिए किए गए उपायों ने उनकी राजनीति को नई दिशा दी है।

क्या अरविंद केजरीवाल के मंसूबे पर पानी फिर सकता है?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए सिरदर्द बन सकता है। अरविंद केजरीवाल ने मध्यवर्ग के हितों को लेकर केंद्रीय सरकार से कई बार मांगें की थीं, जिसमें इनकम टैक्स की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की अपील भी थी। आम आदमी पार्टी ने मिडिल क्लास के लिए अपना घोषणापत्र जारी करते हुए सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य और टैक्स स्लैब में राहत देने की मांग की थी।

हालांकि, जब वित्त मंत्री ने बजट पेश किया, तो अरविंद केजरीवाल की मांग से कहीं ज्यादा बढ़कर फैसला आया। केंद्र सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया, जो अरविंद केजरीवाल के लिए अप्रत्याशित था। इस फैसले ने आम आदमी पार्टी के मध्यम वर्ग को लुभाने के प्रयासों को कमजोर कर दिया है और यह दिखाता है कि अब केंद्र सरकार ने उस वर्ग को पूरी तरह से साधने की कोशिश की है, जिसे आमतौर पर भारतीय जनता पार्टी का समर्थक माना जाता है।

नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल के लिए मुश्किलें

दिल्ली की नई दिल्ली सीट पर चुनावी दंगल और भी दिलचस्प हो सकता है। 2020 के विधानसभा चुनाव में यह सीट आम आदमी पार्टी के खाते में गई थी, लेकिन अरविंद केजरीवाल को इस बार कठिन चुनौती मिल सकती है। नई दिल्ली सीट पर मध्यवर्ग की बड़ी आबादी रहती है, जिसमें सरकारी कर्मचारी, रईस और अपर मिडिल क्लास शामिल हैं। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन पहले ही किया जा चुका है और अब केंद्र सरकार के टैक्स में दी गई छूट ने इस वर्ग को और मजबूती से अपनी ओर खींचा है।

इसके अलावा, अरविंद केजरीवाल की पार्टी मिडिल क्लास के लिए फ्रीबी के जरिए वोट जुटाने में माहिर रही है, लेकिन इस बार उन्हें मध्यम वर्ग के साथ केंद्र सरकार का पक्ष लेने के बाद यह चुनौती भी सामने आ सकती है। सरकार ने मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाएं बनाई हैं और यह दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

मध्यवर्ग के लिए बजट में की गई घोषणाओं का असर

दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव में मध्यवर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है और इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने मध्यवर्ग को सशक्त करने के लिए कई घोषणाएं की हैं। सीनियर सिटिजंस को 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक टैक्स डिडेक्शन दिया गया है। इसके अलावा, टीडीएस की सीमा को भी बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, टीवी, मोबाइल और कैंसर की दवाओं के दाम घटाने की भी घोषणा की गई है, जिससे मध्यवर्ग और निम्न मध्यवर्ग को राहत मिलेगी।

इस सबका सीधा असर यह होगा कि आम आदमी पार्टी को इस बजट के कारण मध्यम वर्ग के बीच एक नई सियासी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

बजट की सियासी चाल और दिल्ली के चुनावी समीकरण

केंद्र सरकार का यह बजट अपने आप में सियासी रणनीति से भरपूर है। केंद्र ने मध्यवर्ग और मध्यम आय वर्ग के लिए कर में राहत देकर और सीनियर सिटिजंस के लिए घोषणाएं कर के आम आदमी पार्टी की फ्रीबी राजनीति को कमजोर किया है। इस बजट ने मध्यवर्ग के लिए वो राहत दी है, जो अरविंद केजरीवाल पहले ही मांग चुके थे, लेकिन इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि यह मध्यवर्ग को सीधे तौर पर केंद्र सरकार के साथ जोड़ने का प्रयास है।

दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान होना है और इस बजट ने दिल्ली के मध्यम वर्ग को केंद्र सरकार के पक्ष में कर दिया है। यह आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि पार्टी की राजनीति अब केवल गरीबों तक ही सीमित नहीं रह सकती।

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