देवघर : देवघर त्रिकूट रोपवे दुर्घटना से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड (DRIL) की याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी की है। कोर्ट ने कहा है कि झारखंड सरकार आकर अपना पक्ष रखे।
बता दें कि, देवघर में 2022 में रोपवे दुर्घटना हो गई थी। इस घटना के बाद प्रदेश की सरकार ने जुर्माना लगाते हुए कंपनी को पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इस आदेश के बाद डीआरआईएल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। यह याचिका न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष पेश की गई।
सुप्रीम कोर्ट में DRIL की याचिका
डीआरआईएल (DRIL) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में राज्य सरकार की ब्लैक लिस्टिंग कार्रवाई और लगाए गए दंड पर आपत्ति जताई है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पक्षकारों को नए तथ्य प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। अब अदालत ब्लैक लिस्टिंग की अवधि और कार्रवाई की वैधता पर विचार करेगी। इससे पहले कंपनी हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई हार चुकी है।
हाईकोर्ट में पहले खारिज हो चुकी याचिकाएं
राज्य सरकार की कार्रवाई के खिलाफ डीआरआईएल ने पहले हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद पुनर्विचार याचिका भी दायर की गई, लेकिन उसमें भी कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण उसे भी निरस्त कर दिया गया। इसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
2022 में हुई थी दुर्घटना
10 अप्रैल 2022 को देवघर के त्रिकूट पर्वत स्थित रोपवे में गंभीर दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी और 59 लोग रोपवे में फंस गए थे। बचाव अभियान के लिए सेना की मदद ली गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने 19 अप्रैल 2022 को उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया था। जांच में दुर्घटना के लिए डीआरआईएल को जिम्मेदार ठहराया गया।
9.11 करोड़ जुर्माना और ब्लैक लिस्टिंग
जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने डीआरआईएल पर 9.11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और कंपनी को पांच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया। दंड वसूली की जिम्मेदारी झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) को सौंपी गई, हालांकि अब तक राशि की वसूली नहीं हो पाई है।
क्या है रोपवे परियोजना
राइट्स ने वर्ष 2005 में डीआरआईएल को रोपवे निर्माण का कार्य दिया था। निर्माण पूरा होने के बाद 21 जुलाई 2008 को रोपवे पर्यटन विभाग को सौंपा गया। संचालन की जिम्मेदारी बाद में जेटीडीसी को दी गई थी।

