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भारत में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामले, जानें कैसे करें रोकथाम

स्वाइन फ्लू के संक्रमण में आने का सबसे ज़्यादा खतरा बुजुर्ग, अस्थमा, मधुमेह या हृदय संबंधी समस्याओं जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोग, गर्भवती महिलाएं और बच्चों को होता हैं।

by Reeta Rai Sagar
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हेल्थ डेस्क। Swine Flu in India: दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से लेकर पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, केरल और यहां तक कि तमिलनाडु तक पूरे भारत में स्वाइन फ्लू के हज़ारों मामले सामने आ रहे हैं। जारी किए गए रिपोर्ट्स के अनुसार जुलाई 2024 तक कुल 178 मौतें दर्ज की गई हैं। कोलकाता के मणिपाल अस्पताल में संक्रामक रोग चिकित्सक डॉ. सायन चक्रवर्ती ने Swine Flu (H1N1) के इस बढ़ते केस के बारे में कुछ जानकारियां दी हैं।

बढ़ रहा है स्वाइन फ्लू का प्रकोप
यह वायरस साल 2009 से देखा जा रहा है तब से स्वाइन फ्लू का प्रकोप हर दो-तीन साल में होता है, लेकिन इस साल इस पैटर्न में कुछ बदलाव देखा गया है, इस साल हमने इस बीमारी का प्रकोप थोड़ा पहले, और अधिक व्यापक रूप में देखा। वैसे तो अगस्त-सितंबर स्वाइन फ्लू का चरम समय पर होता है, लेकिन इस बार बंगाल में यह जून के आखिर सप्ताह में ही शुरू हो गया था, और कई मामले गंभीर थे।

क्या है स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू एक प्रकार का श्वसन रोग है जो इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है। यह वायरस फेफड़ों में अधिक गहराई तक प्रवेश कर जाता है, अन्य प्रकार के फ्लू की तुलना में श्वसन तंत्र को अधिक नुकसान पहुंचाता है तथा इससे निमोनिया होने की अधिक संभावना होती है। यह रोग सबसे ज्यादा सूअरों के श्वसन नली को संक्रमित करता है और मनुष्यों में फैल सकता है। इसके लक्षण में शामिल हैं – खांसी, भूख में कमी, नाक से स्राव आदि। मनुष्यों में स्वाइन फ्लू के लक्षण अधिकांश इन्फ्लूएंजा संक्रमणों जैसे ही होते हैं जैसे- तेज बुखार (100 F या अधिक), खांसी, नाक से स्राव, भूख की कमी, थकान और सिरदर्द।

कैसे कर सकते हैं बचाव

स्वाइन फ्लू से बचाव का सबसे अच्छा और आसान तरीका टीकाकरण करवाना है। इससे मानव में इन्फ्लूएंजा वायरस से संक्रमित होने की संभावना कम हो जाती हैं।

ये होते जल्दी Infected

सबसे ज़्यादा जोखिम में बुजुर्ग, अस्थमा, मधुमेह या हृदय संबंधी समस्याओं जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोग, गर्भवती महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। अगर किसी को सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, पेशाब कम आना या मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने का अनुभव होता है, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना ज़रूरी है। उनका स्वास्थ्य गंभीर रूप से ख़तरे में पड़ सकता है, इसलिए तुरंत इलाज करना काफ़ी फ़ायदेमंद हो सकता है।

एक्सपर्ट के सुझाव

अपने शरीर को भरपूर आराम दें, अच्छा भोजन करें और अपने शरीर को ठीक होने में मदद करने के लिए कम से कम 7 घंटे की नींद लें। हाइड्रेटेड रहना इस बीमारी के दौरान महत्वपूर्ण है, इसलिए स्राव को ढीला करने और कफ को साफ करने में मदद करने के लिए बहुत सारे तरल पदार्थ पिएं।

अपने परिवार की सुरक्षा के लिए, लगभग पांच दिनों के लिए खुद को अलग रखना सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि इससे वायरस फैलने का जोखिम कम होगा। काम पर वापस जाने से पहले जांच करा लें कि यदि आप बेहतर महसूस कर रहे हैं और घर पर आराम से घूम सकते हैं। अगर हल्की-फुल्की एक्टिविटी करना आपको ठीक लगता है, तो आप बाहर निकलना शुरू कर सकते हैं, लेकिन अपने शरीर की सुनें और आराम से रहें।

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