
Jamshedpur : टाटा मोटर्स टीटीसीए में 1 मार्च 2024 से धरने पर बैठे 26 कंवाई चालकों के विवाद को लेकर गुरुवार को एक बार फिर मामला गरमाया। चालकों के एक्स-ग्रेशिया भुगतान और टाटा मोटर्स द्वारा निर्धारित नए वेतन के एरियर का भुगतान नहीं किए जाने के मामले में जिला के माननीय डीएलसी (उप श्रमायुक्त) ने टीटीसीए को जवाब देने का निर्देश दिया था। चालकों के अनुसार, निर्धारित समय पर प्रबंधन की ओर से जवाब नहीं दिया गया।
चालकों का कहना है कि लंबे समय से जारी इस विवाद का समाधान नहीं निकलने से उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो रही है। भुगतान संबंधी मांगों को लेकर धरना जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
टीटीसीए में नेतृत्व को लेकर भी सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि टीटीसीए के कार्यपालक पदाधिकारी जेपी सिंह अपने पद से हट चुके हैं और उनके स्थान पर अब तक किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। वर्तमान में टीटीसीए के अध्यक्ष जयंत नंदा, जो दिल्ली में रहते हैं, इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में चालकों से जुड़े विवादों के समाधान और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ऑल इंडिया यूनियन के निबंधन पर सवाल
चालकों ने ऑल इंडिया यूनियन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। चालकों के अनुसार टाटा मोटर्स और टीटीसीए के बीच हुए समझौते में भी इस यूनियन को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में पहले से जारी धरने के बीच प्रतिनिधित्व और समझौते को लेकर अलग समस्या खड़ी हो गई है।
बीमा, मजदूरी और पीएफ को लेकर गंभीर आरोप
चालकों ने अपनी कार्य परिस्थितियों को लेकर कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं। उनका आरोप है कि चालकों का बीमा नहीं है और उनसे 24 घंटे तक काम लिया जाता है, लेकिन इसके लिए अलग से मजदूरी नहीं दी जाती। इसके अलावा, वेतन का भुगतान बैंक के माध्यम से नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
पीएफ के मामले को लेकर चालकों का कहना है कि प्रबंधन की वजह से यह विवाद पिछले 30 वर्षों से न्यायालय में लंबित है। इन समस्याओं को उन्होंने पूरी व्यवस्था के लिए चुनौती बताया है।
जवाब लेने पहुंचे चालक प्रतिनिधि
मामले में जवाब लेने के लिए गुरुवार शाम चार बजे धरनारत चालकों के नेतृत्वकर्ता ज्ञान सागर प्रसाद के साथ उमेश प्रसाद, धर्मेंद्र प्रसाद, निर्मल सिंह और जुगल प्रसाद संबंधित पक्ष के पास पहुंचे। चालकों को उम्मीद है कि उनके लंबित भुगतान और अन्य श्रम संबंधी समस्याओं पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।
यह भी सवाल उठाया गया है कि जिला प्रशासन, संबंधित अधिकारियों, राज्य सरकार, सांसद, विधायक और राजनीतिक दलों की ओर से अब तक इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पहल क्यों नहीं की गई। चालकों ने मांग की है कि उनके लंबित भुगतान, कार्य परिस्थितियों और पीएफ से जुड़े मामलों का निष्पक्ष समाधान किया जाए तथा जिम्मेदार पक्ष जवाबदेही सुनिश्चित करें।

