Jamshedpur : यूजीसी के नए नियमों का हर तरफ विरोध हो रहा है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने इन नियमों का विरोध करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि उच्च शिक्षा में समानता का संवर्धन करने के नाम पर हाल ही में जो नियम जारी किए गए हैं। वह नख व दंत विहीन हैं। यह अनावश्यक भ्रम फैलाने वाला नियम है। इसे हड़बड़ी में बनाया गया है। यह असमानता बढ़ाने वाला है। इसके प्रस्तावना और उद्देश्य के साथ इसके प्रावधानों का तालमेल नहीं है। उन्होंने मांग की है कि बेहतर होगा यूजीसी से इसे वापस ले ले।

दूसरी तरफ, मशहूर कवि कुमार विश्वास ने भी सोशल मीडिया पर इसका विरोध करते हुए ये कविता लिखी है-
चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा,
रोंया रोंया उखाड़ लो राजा ।
यह कविता स्वर्गीय रमेश रंजन मिश्र द्वारा रचित है।
गौरतलब है कि यूजीसी के नए कानून का विरोध बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है। इसके विरोध में उत्तर प्रदेश के बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपना इस्तीफा तक दे दिया है। इसी के बाद मामला जोर पकड़ गया है। यूजीसी के नए नियमों को भेदभावपूर्ण माना जा रहा है।
क्या हैं यूजीसी के नए नियम
यूजीसी के नए नियमों के तहत धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान और दिव्यांगता के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने की बात कही गई है। विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
गंभीर मामलों में पुलिस को दी जाएगी सूचना
यूजीसी के निर्देश के अनुसार हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में अब समान अवसर केंद्र की स्थापना जरूरी होगी। यह केंद्र वंचित वर्गों के छात्रों और कर्मचारियों को शैक्षणिक, वित्तीय और सामाजिक मामले में मार्गदर्शन देगा। इसके संचालन के लिए एक क्षमता समिति गठित की जाएगी। इस क्षमता समिति में शिक्षक, कर्मचारी, छात्र, नागरिक व समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच कर कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही हर संस्थान में क्षमता हेल्पलाइन शुरू करना अनिवार्य किया गया है। पीड़ित छात्र या कर्मचारी, ऑनलाइन पोर्टल, ईमेल या हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकेंगे। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। गंभीर मामलों में फौरन पुलिस को सूचना देने की व्यवस्था है।
हालात पर नजर रखने को बनेंगे समता समूह
कैंपस में निगरानी के लिए समता समूह बनाए जाएंगे। यह समूह छात्रावास, लाइब्रेरी, लैब, और अन्य स्थानों पर नजर रखेंगे कि किसी के साथ कोई भेदभाव तो नहीं हो रहा है। हर विभाग या छात्रावास में एक समता दूत नामित किया जाएगा। समता समिति के निर्णय से अगर कोई असंतुष्ट है तो वह 30 दिन के अंदर विश्वविद्यालय लोकपाल के पास अपील कर सकेगा। यूजीसी राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी समिति बनाएगा।
नियम का उल्लंघन होने पर रद हो सकती है मान्यता
संस्थाओं को वार्षिक अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर विश्वविद्यालय को यूजीसी योजनाओं से वंचित कर दिया जाएगा और ऑनलाइन ओडीएल कार्यक्रम बंद कर दिया जाएगा। संबंधित संस्थान को मान्यता सूची से हटाने तक की कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। यूजीसी का गजट नोटिफिकेशन विश्वविद्यालयों को भेज दिया गया है और इसी के अनुरूप आगे की योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

