सेंट्रल डेस्क : UAPA का फुल फॉर्म है Unlawful Activities (Prevention) Act यानी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम। यह एक भारतीय कानून है जो आतंकवाद और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया है। इस कानून को 1967 में बनाया गया था और इसे 2019 में संशोधित किया गया था। इसका प्रमुख उद्देश्य आतंकवादियों और उनके समर्थकों के खिलाफ कानूनी कदम उठाना है। पुलिस और जांच एजेंसियां इस कानून के तहत ऐसे आतंकियों, अपराधियों और संदिग्धों को चिन्हित करती है, जो आतंकी गतिविधियों में शामिल होते हैं।
क्या है UAPA?
यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) कानून भारत सरकार द्वारा 1967 में पारित किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य भारत में आतंकवादी गतिविधियों को रोकना और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है। इस कानून को संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत दी गई बुनियादी आजादी पर तर्कसंगत सीमाएं लगाने के लिए लाया गया था। पिछले कुछ सालों में आतंकी गतिविधियों से संबंधी POTA और TADA जैसे कानून खत्म कर दिए गए, लेकिन UAPA कानून अब भी मौजूद है और पहले से ज्यादा मजबूत है।
2019 ने किया गया संशोधन
2019 में यूएपीए कानून को संशोधित किया गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण को और भी सख्त बनाया गया और आतंकवादी गतिविधियों के लिए संसाधन जुटाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया। यूएपीए के तहत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किए जाते हैं।
कौन सी धाराओं के तहत होता है केस दर्ज?
UAPA में धारा 18, 19, 20, 38 और 39 के तहत केस दर्ज होता है। धारा 38 तब लगती है जब आरोपी के आतंकी संगठन से जुड़े होने की बात पता चलती है। धारा 39 आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने पर लगाई जाती है। इस एक्ट के सेक्शन 43D (2) में किसी शख्स की पुलिस कस्टडी की अवधि दोगुना करने का प्रावधान है। इस कानून के तहत 30 दिन की कस्टडी मिल सकती है। वहीं न्यायिक हिरासत 90 दिन की भी हो सकती है। बता दें कि अन्य कानूनों में अधिकतम अवधि 60 दिन ही होती है।
कौन से अपराध शामिल हैं UAPA एक्ट में?
आतंकवादी गतिविधि- इसमें विभिन्न प्रकार की आतंकवादी गतिविधियां शामिल हैं, जैसे आतंकवादी हमले, बम धमाके, आतंकवादी स्थलों का आक्रमण, आदि।
आतंकवादी संगठन- इसके अंतर्गत आतंकवादी संगठनों का प्रमोशन, संचालन और सहयोग शामिल है।
आतंकवादी वित्तपोषण- यह अपराध आतंकवादी संगठनों को वित्तपोषण प्रदान करने और अपने गतिविधियों को निष्पादित करने में सहायता करने के रूप में देखा जाता है।
आतंकवादी प्रशिक्षण- यह अपराध आतंकवादी संगठनों द्वारा सदस्यों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित करने के लिए शामिल है।
आतंकवादी सामग्री का प्रसार- इसके अंतर्गत आतंकवादी सामग्री का वितरण और प्रसारण शामिल है, जैसे विस्फोटक, हथियार, और अन्य आतंकी उपकरण।
आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना- यह अपराध उन व्यक्तियों को शामिल करता है जो आतंकवादी गतिविधियों में साझेदारी करते हैं या उनके साथ कोई भी संबंध रखते हैं।
आतंकवादी गतिविधियों के लिए संसाधन जुटाना- इस अंश में यह दर्ज किया जाता है कि कैसे आतंकवादी गतिविधियों के लिए संसाधन जुटाने में सहायक रूप में व्यक्ति शामिल होते हैं।
UAPA एक्ट के तहत ये अपराध घोषित किए जाते हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है, जिसके तहत आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सकता है और उन्हें सजा हो सकती है। इस एक्ट का उद्देश्य देश की सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को सुनिश्चित करना है, लेकिन इसका प्रयोग कई बार विवादों में आया है और खुलासे की मांग की गई है।
संदिग्ध व्यक्ति को किया जाता है आतंकवादी घोषित
इस कानून के तहत, किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। 2019 के संशोधन के बाद, इस कानून के तहत संदिग्ध व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने की प्रक्रिया को और अधिक सरल कर दिया गया और जिसके बाद इस कानून को ताकत मिल गई कि किसी व्यक्ति को भी जांच के आधार पर आतंकवादी घोषित किया जा सकता है।
पहले केवल संगठन को किया जाता था आतंकवादी घोषित
आतंकवादी का टैग हटवाने के लिए उसे कोर्ट की बजाय सरकार की बनाई गई रिव्यू कमेटी के पास जाना होगा। हालांकि बाद में कोर्ट में अपील की जा सकती है। पहले यह शक्ति केवल किसी संगठन को लेकर थी। यानी इस एक्ट के तहत किसी संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाता था। सदन में विपक्ष को आपत्ति पर गृहमंत्री अमित शाह का कहना था कि आतंकवाद को जड़ से मिटाना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए यह संशोधन जरूरी है।
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आजीवन कारावास की हो सकती है सजा
यूएपीए (Unlawful Activities (Prevention) Act) कानून के तहत, किसी व्यक्ति पर केस दर्ज होने पर उसे अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती, यहां तक कि अगर पुलिस ने उसे छोड़ दिया हो तो भी यह नहीं हो सकता। दरअसल, कानून के सेक्शन 43D (5) के मुताबिक, कोर्ट शख्स को जमानत नहीं दे सकता, अगर उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया केस बनता है। इसके अलावा, यूएपीए कानून में गैरकानूनी संगठनों, आतंकवादी गैंग और संगठनों की सदस्यता को लेकर कड़ी सजा का प्रावधान है। सरकार द्वारा घोषित आतंकी संगठन के सदस्य पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है।

