सेंट्रल डेस्क : 15 अगस्त 2023 को अपना 77वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों को संबोधित करेंगे। वहीं,देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले जवानों को सम्मानित भी किया जाएगा।

15 अगस्त को ही क्यों चुना गया आजादी का दिन
15 अगस्त के दिन पूरे देश में देशभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और फ्लैग होस्टिंग भी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर 14, 16 या फिर 20 नहीं, आखिर 15 अगस्त को ही क्योंकि आजादी के दिवस को चुना गया।
30 जून को ही आजाद हो गया था देश
ब्रिटिश हुकूमत से भारत 30 जून 1948 को ही आजाद हो गया था। 30 जून को भारत को अंग्रेजों ने सत्ता सौंप दी थी। लेकिन उसी समय नेहरू और जिन्ना के बीच भारत व पाकिस्तान के बंटवारे का मुद्दा शुरू हो गया। इस दौरान मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान की मांग कर दी। जिसके बाद सांप्रदायिक दंगे की संभावना बढ़ गई। जिसके बाद भारत को 15 अगस्त 1947 को ही आजादी करने का फैसला लिया गया।

भारत की आजादी को लेकर 4 जुलाई 1947 को माउण्टबेटन द्वारा ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में इंडियन इंडिपेंडेंस बिल पेश किया गया था। इस बिल को ब्रिटिश संसद द्वारा तुरंत मंजूरी दे दी गई और 15 अगस्त 1947 के दिन भारत को आजादी देने की घोषणा कर दी गई।

विभाजन और स्वतंत्रता
आजादी का आंदोलन खत्म होने के बाद भारत का विभाजन हुआ। ब्रिटिश सरकार द्वारा आजादी की घोषणा के बाद भारत के सभी राजनीतिक दलों ने माउंटबेटन योजना को स्वीकार कर लिया। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो आयोगों का गठन किया। इनका काम भारत के विभाजन की देख-रेख करना और नए गठित राष्ट्रों की अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं का निर्धारण करना था।
छोटी-बड़ी रियासतों का विलय
भारत में स्वतंत्रता के समय 565 छोटी-बड़ी रियासतें थीं। जिनका भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने विलय करवाया। 15 अगस्त 1947 तक जम्मू कश्मीर, जूनागढ़ व हैदराबाद जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर सभी रियासतों ने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे। उस वक्त गोवा पर पुर्तगालियों और पुडुचेरी पर फ्रांसीसियों का अधिकार था।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने विभाजन काल की विभीषिका को किया याद
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने विभाजन काल की विभिषिका को याद करते हुए की विभिषिका को ट्वीट कर लिखा “देश के इतिहास में 14 अगस्त की तिथि कभी न भूलने वाली तिथि है। आज ही के दिन मजहबी और नफरती मानसिकता ने भारत का दु:खद विभाजन किया, जिसके दुष्परिणामस्वरूप असंख्य देश वासियों ने यातनाएं झेलीं और अपनी जान गंवाई। ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर बलिदान हुए सभी नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि!, इस क्रूर-वीभत्स यातना के साक्षी सभी नागरिकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं”।

सामाजिक सद्भाव बढ़ाने पर जोर
साल 1947 में देश का विभाजन होने पर लाखों लोगों ने अपने प्राण गंवा दिए थे। इस दौरान भारत से कटकर पाकिस्तान एक नया देश बना था। इस बंटवारे ने जहां लोगों को सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व मानसिक रूप से तोड़ा था। वहीं विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य विभाजन के समय जान गंवाने वालों को याद करते हुए आपस में व्याप्त भेदभाव को खत्म कर सामाजिक सद्भाव व मानव सशक्तिकरण की भावना को बढ़ाना है।

इस वर्ष का है यह थीम
इस साल स्वतंत्रता दिवस की थीम ‘आजादी का अमृत महोत्सव के साथ’ “Nation First, Always First” यानी ‘राष्ट्र पहले, हमेशा पहले’ है। 15 अगस्त को लेकर भारत सरकार की तरफ से सभी तरह की तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं।

