रांची : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में 18वें दिन मंगलवार को जैप-आईटी के माध्यम से राज्य भर में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति और एजेंसी चयन पर सवाल उठाए गए। कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने इस मुद्दे को सदन में उठाया, जिसमें उन्होंने कहा कि राज्य भर में कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति बाहरी एजेंसियों के माध्यम से की जा रही है और ऑपरेटरों को मिलने वाली सैलरी में भी कटौती की जाती है।
प्रदीप यादव ने उठाए महत्वपूर्ण सवाल
विधायक प्रदीप यादव ने सवाल किया कि जैप-आईटी में एजेंसी का चयन निविदा के आधार पर होता है, लेकिन निविदा में ऐसी शर्तें जोड़ी जाती हैं कि राज्य की कंपनियां इन निविदाओं में भाग ही नहीं ले पाती हैं। इसके अलावा, उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या सरकार को जानकारी है कि एजेंसी ऑपरेटरों की सैलरी से पैसे का हिस्सा ले रही है, और कितनी कंपनियों पर इस बारे में कार्रवाई की गई है। यादव ने यह भी सवाल उठाया कि 2021 से एक ही एजेंसी का चयन होने से क्या यह संदेह पैदा नहीं करता।
मंत्री रामदास सोरेन का जवाब
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए प्रभारी मंत्री रामदास सोरेन ने सदन को बताया कि जैप-आईटी के जरिए मैन पावर सप्लाई का काम एजेंसी करती है। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ल्यूमिनस कंपनी के खिलाफ शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि विभागीय स्तर पर जांच की जाएगी और एक महीने के भीतर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जिला स्तर पर टेंडर और एजेंसी चयन की प्रक्रिया पर विचार करेगी।
माना जा रहा है कि विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर चर्चा के बाद यह साफ हो गया कि राज्य सरकार इस मामले में गंभीर है और जल्द ही कार्रवाई करेगी। मंत्री द्वारा दी गई जानकारी ने सवालों का समाधान करने का प्रयास किया, जबकि प्रदीप यादव ने इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाकर राज्य के हित में बेहतर व्यवस्था की आवश्यकता जताई।

