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भानू प्रताप की जमानत याचिका खारिज : जमीन घोटाले में फंसा नेटवर्क अब ईडी के शिकंजे में

छापेमारी के दौरान ईडी को भानु प्रताप के रांची और सिमडेगा स्थित आवास से कई जमीन खरीद-बिक्री से संबंधित डीड और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे।

by Reeta Rai Sagar
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Ranchi (Jharkhand): सेना के अधीनस्थ भूमि की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे बड़गाईं अंचल के राजस्व कर्मचारी भानू प्रताप को पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने उसकी कस्टडी आधारित जमानत याचिका खारिज कर दी है।

भानु प्रताप ने अदालत में अपनी निरंतर कस्टडी को आधार बनाकर जमानत की गुहार लगाई थी, लेकिन ईडी के विशेष लोक अभियोजक शिव कुमार उर्फ काका ने याचिका का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष की दलीलों से संतुष्ट होकर अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।

भानु प्रताप के पास से मिले थे डीड और दस्तावेज

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 13 और 14 अप्रैल 2023 को इस मामले में झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुल 22 ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान ईडी को भानु प्रताप के रांची और सिमडेगा स्थित आवास से कई जमीन खरीद-बिक्री से संबंधित डीड और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे।

जांच में यह सामने आया कि सेना के कब्जे वाली जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री के पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जिसमें दस्तावेजों की फर्जी तैयारियों से लेकर रजिस्ट्री कार्यालयों में मिलीभगत तक शामिल थी।

भानु प्रताप व अन्य गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेज गिरोह का पर्दाफाश

ईडी की जांच में केवल भानु प्रताप ही नहीं, बल्कि इस रैकेट में संलिप्त कई अन्य आरोपितों के नाम भी सामने आए। इनमें फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले अफसर अली, सद्दाम, इम्तियाज अहमद, तल्हा खान, प्रदीप बागची और फैयाज खान जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी को अलग-अलग तारीखों में गिरफ्तार किया गया था। इन पर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं।

सख्त रुख में अदालत, गंभीर आर्थिक अपराधों में नहीं मिलेगी राहत

विशेष अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किया जाना इस बात का संकेत है कि अदालत आर्थिक अपराधों और सार्वजनिक संसाधनों की हेराफेरी को लेकर गंभीर है। मामले में अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार है और ईडी की ओर से चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।

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