सूर्य का गोचर, बारिश और आपदाओं का संकेत
चतरा। रविवार यानी 22 जून को दोपहर 2:12 बजे से सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। यह गोचर सिर्फ एक साधारण परिवर्तन नहीं है, बल्कि इसके साथ कई शुभ-अशुभ संकेत जुड़े हुए हैं। काशी के प्रसिद्ध हृषीकेश पंचांग और चतरा के ज्योतिष विशेषज्ञ आचार्य पंडित चेतन पाण्डेय के अनुसार यह गोचर कृषि और सामाजिक जीवन को प्रभावित करेगा।
पांच ‘आढ़क’ बारिश के संकेत, कृषि के लिए शुभ
पंचांग के अनुसार इस बार आर्द्रा नक्षत्र में पांच ‘आढ़क’ बारिश होने का अनुमान है, जो कृषि कार्य के लिए बेहद शुभ रहेगा। हालांकि मंडूक (मूषक) वाहन के चलते तेज हवा और मूसलाधार बारिश होने के साथ-साथ बाढ़, बिजली गिरने और भू-स्खलन जैसी आपदाओं का खतरा भी रहेगा।
सूर्य का गोचर और राहु का असर
आर्द्रा नक्षत्र राहु के अधिपत्य में है और यह मिथुन राशि का हिस्सा है, जिस पर बुध का भी असर रहता है। जब सूर्य राहु के नक्षत्र में प्रवेश करता है तो यह कभी सामान्य परिवर्तन लाता है तो कभी प्राकृतिक या सामाजिक असंतुलन का संकेत भी देता है। वर्तमान में गुरु (बृहस्पति) मिथुन राशि में अस्त अवस्था में है, और बुध भी पहले से मौजूद है। यह संयोजन बेहद असरदार माना गया है।
सूर्य, रविवार और द्वादशी का मेल – पशुधन में जोखिम
द्वादशी तिथि में सूर्य का गोचर वैसे तो शुभ माना जाता है, मगर रविवार और द्वादशी का मेल इस बार पशु-पालन से जुड़े क्षेत्रों में जोखिम का संकेत दे रहा है। विशेषकर 6 जुलाई तक पशुओं में महामारी फैलने का खतरा रहेगा।
विशेष स्थिति और चांडाल योग का असर
22 जून से 25 जून तक आर्द्रा नक्षत्र का पहला चरण रहेगा, जिसमें भूमि की जुताई या बुआई करना निषिद्ध है, क्योंकि यह समय कृषि के लिए अशुभ माना गया है।
रविवार को सूर्य के गोचर के साथ-साथ मिथुन राशि में गुरु-राहु का चांडाल योग और सिंह राशि में मंगल-केतु का अंगारक योग बनेगा। इन दोनों योगों का मेल मिथुन, सिंह और कुम्भ राशि में प्राकृतिक आपदाओं, जैसे- भीषण गर्मी, दुर्घटनाएँ, महामारी, भूकम्प या बाढ़ का संकेत दे सकता है।
मेष, वृषभ, सिंह, कन्या और कुम्भ राशि वालों के लिए शुभ समय
आचार्य चेतन पाण्डेय के अनुसार, सूर्य के इस गोचर से मेष, वृषभ, सिंह, कन्या और कुम्भ राशि वालों के करियर, कारोबार और सामाजिक प्रतिष्ठा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

