Jharkhand Shaharnama : तीसरे स्तर की लोकशाही का चुनाव होने वाला है। इसका बिगुल बजने के साथ ही यह भी तय हो गया कि कोल्हान की तथाकथित राजधानी मानगो, आधी आबादी के लिए आरक्षित रहेगी। इसका कयास तो पिछले बार से ही लगाया जा रहा था, जब मयूरी के चुनाव लड़ने में तकनीकी पेंच आते ही पूरे सूबे का निकाय चुनाव स्थगित हो गया था।
Read Also: Jharkhand shaharnama : शहरनामा : बोरी का बढ़ गया था वजन्र
बहरहाल, पिछले बार वाली कैंडिडेट यानी मयूरी तो तय हो गई हैं, बच्चों के फेर में फंसे अप्रत्याशित उम्मीदवार ने भी मयूरी के पक्ष में राय सुना दी है। उधर, सारे मयूर अपनी मयूरी को खोज-खोजकर उतार रहे हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक चलकर पैर में पड़े छाले दिखाकर एक और मयूरी के मैदान में उतरने का एलान हो चुका है। पता नहीं, अब कितनी मयूरी और मयूराक्षी मैदान में दिखेंगी, यह देखने वाली बात होगी। चुनाव के बाद बड़े राजनीतिक दल उन पर डोरे डालने निकलेंगे।
Read Also- Jharkhand Shaharnama : शहरनामा : डॉक्टर ही मिला बेड पर
इंदौर ने खोल दी आंखें
हाल ही में आठ बार से स्वच्छता चैंपियन का खिताब जीतने वाले शहर से ऐसी सड़ांध वाली खबर सामने आई कि हर किसी ने अपने नाक-कान बंद कर लिए। इसके साथ ही उन शहरवासियों की आंखें भी खुल गईं, जो हर बार सफाई का ढोंग रचकर चैंपियन बनने की होड़ में लग जाते थे। अपनी लौहनगरी भी अछूती नहीं है। ऊपर-ऊपर साफ दिखने या दिखाने के चक्कर में कितनी गंदगी कहां डंप हो जाती थी, इसकी पोल भी कई बार खुल चुकी है। ताज्जुब तो तब होता था, जब अलग-अलग श्रेणी में उस कस्बे को भी सफाई का सरताज बताया जाता था, जो साल भर गंदगी से जंग करता रहता है। जनप्रतिनिधि भी नाक बंद करके गलियों से गुजरते थे, लेकिन पुरस्कार मिलने पर बधाई देते नहीं थकते थे। अब पता चला कि सर्वे के दौरान लोगों के मोबाइल छीनकर कैसे रेटिंग दिलाई जाती थी।
Read Also- Jharkhand shaharnama : शहरनामा : बोरी का बढ़ गया था वजन्र
कंबल ही कंबल
मैं यहां किसी सेल की बात नहीं कर रहा हूं, ना किसी का प्रचार कर रहा हूं। मैं तो उनकी बात कर रहा हूं, जो ठंड के मौसम का इंतजार करते रहते हैं। उन्हें गरीबों को कंबल देकर जितनी खुशी नहीं मिलती है, उतनी अखबार-चैनल में अपनी फोटो-वीडियो देखकर मुस्कान खिल जाती है। हालांकि, इसी शहर में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो सौ-पचास कंबल बांट देते हैं और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं लगती। इसमें एक असामान्य बात यह देखने में आती है कि गरीबों का इलाका लगभग फिक्स रहता है। एक ही गांव-मोहल्ले में हर सीजन में 8-10 लोग कंबल बांट आते हैं। इस हिसाब से उनके यहां कंबलों का गोदाम बन जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। वे हर बार ठंड में उसी चीथड़े में नजर आते हैं। शायद ही किसी कंबल बांटने वाले ने इस बात पर कभी चिंतन किया होगा।
Read ALso- Jharkhand Shaharnama : शहरनामा : घाट-घाट पर फोकस
गोलचक्कर पर एक्सीडेंट
साकची में पड़ने वाले बस स्टैंड के गोलचक्कर पर दो दिन पहले एक्सीडेंट हो गया, जिसमें बाइक सवार दंपती कुचल दिए गए। विडंबना यह है कि वहां कम से कम आधा दर्जन खाकी-सफेद वर्दीधारी भारी वाहनों को वीआईपी ट्रीटमेंट देने के लिए बेचैन दिखाई देते हैं। हर पांच मिनट पर पुल को जाम होते हुए देखना इनके मन को सुकून देता है। बहरहाल, इतने वर्दीधारियों की मौजूदगी में जिस वाहन की स्पीड 10 किलोमीटर होनी चाहिए, वह दस गुना बढ़ गई। एनएच की तरह वह वाहन बाइक सवार दंपती को रौंदते हुए घसीट ले गया। इससे भी आश्चर्य की बात यह रही कि वह सभी वर्दी वालों की आंख में धूल झोंकते हुए फरार भी हो गया। बाद में भी उसे सख्त सजा नहीं मिलने वाली है, यह भी तय है। जब उसे यहां के आला अधिकारियों ने ही वीआईपी बनाकर रखा है, तो कार्रवाई कौन करेगा।
Read Also- Shaharnama : शहरनामा : नेताजी बंगाल की ओर

