घाटशिला : याद कर लोग सिहर उठते हैं 19 साल पहले जब होली की मस्ती के बीच नक्सलियों ने खून से धरती लाल कर दी थी। उस साल भी होली 4 मार्च को थी। पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत घाटशिला प्रखंड के बाघड़िया गांव में 4 मार्च 2007 की होली लोगों के जेहन में खून से सनी याद के रूप में दर्ज है। उस दिन रंग और उमंग के बीच गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल उठा था। तत्कालीन सांसद सुनील महतो की नक्सलियों ने फुटबॉल मैच के दौरान हत्या कर दी थी।
फुटबॉल मैच के दौरान तड़तड़ाईं थीं गोलियां
आगामी 4 मार्च 2026 को सुनील महतो हत्याकांड के खुलासे की मांग जोर पकड़ेगी। यह संयोग ही है कि 2007 के बाद 2026 में 4 मार्च को होली के दिन शहादत दिवस मनाया जाएगा। घटना घाटशिला प्रखंड के बाघुडिया गांव में हुई थी। होली के मौके पर गांव में फुटबॉल मैच का आयोजन किया गया था। तत्कालीन सांसद सुनील महतो मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। मैदान में बड़ी संख्या में ग्रामीण, खिलाड़ी और समर्थक मौजूद थे। इसी दौरान घात लगाकर पहुंचे नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने बेहद नजदीक से सांसद पर गोलियां चलाईं। हमले में सुनील महतो के साथ उनके सुरक्षाकर्मी और झामुमो नेता प्रभाकर महतो भी मारे गए थे।
पूरे इलाके में मच गई थी अफरातफरी
इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। रंगों का त्योहार देखते ही देखते मातम में बदल गया था। सुनील महतो उस समय झारखंड की राजनीति में उभरते हुए युवा चेहरों में गिने जाते थे। वे जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और ग्रामीण इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। उनकी हत्या को नक्सलियों द्वारा सुनियोजित हमला बताया गया। इस घटना ने न केवल पूर्वी सिंहभूम बल्कि पूरे राज्य को झकझोर दिया था। राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।
सीबीआई की जांच में भी नहीं हो सका खुलासा
नक्सली वारदात को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाए। सीबीआई जांच, लेकिन अब तक पूरा खुलासा नहीं हुआञ मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई। सीबीआई ने मामले की विस्तृत जांच की। कई संदिग्धों से पूछताछ हुई, कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं और चार्जशीट दायर की गई। इसके बावजूद स्थानीय लोगों और परिजनों का मानना है कि इस हत्याकांड के सभी पहलुओं का पूर्ण खुलासा अब तक नहीं हो पाया है।
आज भी उठते हैं कई सवाल
यह सवाल आज भी उठता है कि हमले की साजिश किस स्तर पर रची गई थी और क्या सभी जिम्मेदार लोग कानून के शिकंजे में आए ? आगामी 4 मार्च 2026 को सुनील महतो की शहादत दिवस पर एक बार फिर मामले की निष्पक्ष और अंतिम रूप से खुलासा करने की मांग उठाई जाएगी। स्थानीय समर्थक, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धांजलि सभा आयोजित किया जा रहा है। संयोग से 2007 के बाद 2026 में 4 मार्च को होली पड़ा है।
न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोग
घाटशिला और आसपास के क्षेत्रों में आज भी लोग उस घटना को याद कर भावुक हो जाते हैं। बाघुडिया का वह मैदान, जहां कभी खेल एक और उत्सव का माहौल था, इतिहास के काले अध्याय का साक्षी बन चुका है। 19 वर्ष बीतने के बाद भी यह मामला लोगों के जेहन में ताजा है। हर वर्ष शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि के साथ-साथ न्याय की मांग दोहराई जाती है। 4 मार्च 2026 को जब एक बार फिर होली के रंग बिखरेंगे, तब सुनील महतो की शहादत की याद और भी गहरी होगी और उनके समर्थकों की आवाज एक बार फिर गूंजेगी कि मामले का पूरा सच सामने लाया जाए। खुशी के पर्व पर हुई इस हत्या पर न्याय मिलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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