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Seraikela News: टायो कॉलोनी के आयुष कुमार ने यूपीएससी में 143वीं रैंक हासिल की, आईपीएस बनने का सपना किया साकार

परिवार मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के मालती गांव का रहने वाला है। फिलहाल टायो कॉलोनी के एच-40 क्वार्टर में उनकी पत्नी रहती हैं।

by Vivek Sharma
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Seraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के टायो कॉलोनी निवासी आयुष कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 143वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। पहले ही प्रयास में मिली इस बड़ी सफलता से उनके परिवार और इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है। शुक्रवार को यूपीएससी का परिणाम जारी होने के बाद से ही आयुष को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

बताया जा रहा है कि अपनी रैंक के आधार पर आयुष को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) मिलने की संभावना है, लेकिन उनकी इच्छा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में जाने की है।

आयुष के पिता प्रदीप कुमार टायो कंपनी में कर्मचारी रहे हैं। टायो कंपनी के बंद हो जाने के बाद उन्हें बच्चों की पढ़ाई को लेकर काफी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। वर्तमान में प्रदीप कुमार दुर्गापुर में कार्यरत हैं। परिवार मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के मालती गांव का रहने वाला है। फिलहाल टायो कॉलोनी के एच-40 क्वार्टर में उनकी पत्नी रहती हैं।

चिन्मया से पूरी की थी प्लस टू की शिक्षा

आयुष की प्रारंभिक पढ़ाई टायो कॉलोनी स्थित विद्या ज्योति स्कूल से हुई। दसवीं के बाद उन्होंने जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित चिन्मया विद्यालय से प्लस टू की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरुघासीदास विश्वविद्यालय से वर्ष 2023 में इंजीनियरिंग डिजाइन में बीटेक की डिग्री हासिल की।

बीटेक के बाद बन गए थे प्रोडक्ट डिजाइनर

बीटेक के बाद आयुष बेंगलुरु में प्रोडक्ट डिजाइनर के पद पर काम करने लगे और वहीं से यूपीएससी की तैयारी शुरू की। महज दो साल की तैयारी में उन्होंने यह बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली।

परिवार में आयुष के अलावा उनकी एक बड़ी बहन भी हैं, जो बीटेक इंजीनियर हैं और कोलकाता में टीसीएस में कार्यरत हैं। उनकी माता कुमारी रेणुका गृहिणी हैं।

अभी बेंगलुरु में हैं आयुष

आयुष के पिता प्रदीप कुमार ने बताया कि आयुष इस समय बेंगलुरु में हैं और एक-दो दिन में गम्हरिया पहुंचने की संभावना है। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्य अलग-अलग जगहों पर होने के कारण इस बड़ी सफलता का जश्न अभी एक साथ नहीं मना पा रहे हैं। शुक्रवार सुबह ही वे दुर्गापुर पहुंचे थे और वहीं उन्हें आयुष की सफलता की खबर मिली, जिससे परिवार में खुशी का माहौल है।

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