RANCHI : बिरसा मुंडा फन पार्क में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में तीर्थंकर बालक के जन्म कल्याणक का भव्य आयोजन किया गया। प्रभु आदिनाथ का जन्मोत्सव पर मंगल ध्वनियों, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नृत्य के साथ पूरे परिसर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। सौधर्म इंद्र और शची इंद्राणी राजा नाभिराय के दरबार पहुंचे। शची इंद्राणी ने माता मरू देवी के गर्भ कक्ष से तीर्थंकर बालक को लिया, जिसे सौधर्म इंद्र ने शची इंद्राणी से लेकर नगर भ्रमण करते हुए सुमेरु पर्वत पर स्थित पांडुक शिला पर विराजमान कर अभिषेक किया और नाम आदि कुमार रखा गया। प्रातः काल से ही पूजन और पाषाण से भगवान बनने की क्रिया होती रही। मुनिश्री का प्रवचन हुआ, जिसमें उन्होंने जन्म कल्याणक के विषय में और क्रियाओं के बारे मे बताया कि जन्म केवल शरीर का नहीं, चेतना के जागरण का भी होता है। भगवान आदिनाथ का जन्म हमें भीतर के अज्ञान को मिटाकर सत्य, अहिंसा और संयम को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। जन्म कल्याणक की पवित्रता और आत्ममोक्ष के मार्ग पर चलने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भगवान के जन्म कल्याणक का उत्सव हमें स्मरण कराता है कि हर जन्म केवल शरीर का नहीं, बल्कि चेतना के जागरण का अवसर है। जन्म केवल उत्सव नहीं, उत्तरदायित्व है। जिसने अपने जन्म को साधना, संयम और सेवा से जोड़ लिया, वही जीवन का सच्चा सफल बनता है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य बाहरी उपलब्धियों में उलझकर अंतर्मन के उत्थान को भूल जाता है। पंचकल्याणक हमें आत्मपरीक्षण और आत्म संयम की ओर प्रेरित करता है। मुनिश्री ने विशेष रूप से युवाओं से आवाह्न किया युवा शक्ति यदि धर्म की दिशा में जागे, तो समाज का भविष्य उज्ज्वल हो जाएगा। अपने भीतर के भगवान को पहचानो, वही जीवन का वास्तविक परिवर्तन है। जीवन में चार सत्य हैं, जिसने जन्म लिया है। मृत्यु निश्चित है, यह जीवन का एक सत्य है, न कुछ लेकर आए हैं, न हीं कुछ लेकर जाएंगे। यह जीवन का दूसरा सत्य है, जो करेंगे वह भरेंगे यह जीवन का तीसरा सत्य है, मेरा केवल मैं हूं, बाकी सब संयोग है, यह जीवन का चौथा सत्य है।

