रांची। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में 9 से 11 अप्रैल तक मक्का पर राष्ट्रीय स्तर की बड़ी कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में देशभर से 250 से अधिक कृषि वैज्ञानिक भाग लेंगे।
यह कार्यशाला मक्का से जुड़ी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 69वीं वार्षिक बैठक के रूप में आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मक्का उत्पादन बढ़ाने और बदलते मौसम के अनुसार खेती की नई रणनीतियों पर चर्चा करना है।
उत्पादन बढ़ाने और नई किस्मों पर होगा फोकस
कार्यशाला में मक्का की नई और अधिक उपज देने वाली किस्मों की पहचान की जाएगी। साथ ही, अलग-अलग राज्यों में मक्का उत्पादन की स्थिति और उपलब्धियों की समीक्षा भी की जाएगी। वैज्ञानिक मिलकर एक ऐसा रोडमैप तैयार करेंगे, जिससे आने वाले समय में मक्का की खेती को और मजबूत किया जा सके।
इस कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र से जुड़े कई बड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसमें आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। वहीं, आईसीएआर और देश के प्रमुख कृषि संस्थानों के वैज्ञानिक भी इसमें भाग लेंगे।
इसके अलावा बीज कंपनियों, कृषि उद्योगों, प्रगतिशील किसानों और 37 कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि भी इस कार्यशाला में शामिल होंगे।
मक्का का बढ़ता महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, मक्का देश की एक महत्वपूर्ण फसल है और इसका उपयोग कई क्षेत्रों में होता है। यह चारा, पशु आहार, खाद्य पदार्थ, बायोफ्यूल और औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। भारत में मक्का की खेती 1.2 करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में की जाती है। वर्तमान में इसका सबसे ज्यादा उपयोग पोल्ट्री फीड में होता है।
भविष्य की रणनीति बनेगी
इस कार्यशाला के जरिए मक्का उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों को नई दिशा देने की कोशिश की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मंथन से किसानों को बेहतर तकनीक और अधिक उत्पादन के अवसर मिलेंगे।

