Ranchi: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, लेकिन कांग्रेस अपनी ही अंदरूनी कलह में उलझकर कमजोर नजर आ रही है। खाली हो रही दो सीटों में से एक पर पार्टी दावेदारी तो कर रही है, लेकिन मौजूदा हालात उसे आक्रामक रुख अपनाने से रोक रहे हैं।
पार्टी के भीतर विधायकों और संगठन के बीच समन्वय की कमी साफ दिख रही है। यही वजह है कि कांग्रेस महागठबंधन के भीतर खुलकर अपनी बात रखने की स्थिति में नहीं है। हालांकि इधर-उधर से चुनाव लड़ने की चर्चाएं जरूर चल रही हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर पार्टी अभी निर्णायक रुख नहीं ले पा रही है।
हाल के दिनों में पार्टी में टूट की अफवाहों ने भी हालात को और जटिल बना दिया है। इन खबरों के बाद शीर्ष नेतृत्व सतर्क हो गया है, जिससे राज्यसभा चुनाव को लेकर नेताओं की सक्रियता भी सीमित हो गई है।
उधर, महागठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा अपनी रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। उसके नेताओं के बयान कांग्रेस पर दबाव बनाने का काम कर रहे हैं। इससे कांग्रेस की स्थिति और असहज हो गई है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पार्टी दो गुटों में बंट सकती है। हालांकि शीर्ष नेताओं ने इन अटकलों को खारिज किया है, लेकिन कार्यकर्ताओं के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कुछ दिन पहले ही पार्टी के कई विधायक नई दिल्ली पहुंचकर आलाकमान से मिले थे और संगठन से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर की। इन घटनाओं ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति को उजागर कर दिया है।
ऐसे हालात में कांग्रेस के लिए फ्रंट फुट पर आकर राजनीति करना मुश्किल हो गया है। झामुमो के सामने मजबूती से दावेदारी पेश करना फिलहाल पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है।

