फीचर डेस्क : देशभर में आज अक्षय तृतीया का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इसे अत्यंत शुभ और फलदायी तिथि माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए दान, पूजन और निवेश का फल अक्षय होता है, यानी कभी समाप्त नहीं होता। यही कारण है कि इस दिन सोना-चांदी, भूमि और अन्य स्थायी संपत्ति की खरीदारी को विशेष महत्व दिया जाता है।
पूरे दिन अबूझ मुहूर्त, कभी भी कर सकते हैं खरीदारी
इस वर्ष अक्षय तृतीया पर पूरे दिन अबूझ मुहूर्त का संयोग बना हुआ है। इसका अर्थ है कि किसी विशेष समय की बाध्यता के बिना दिनभर किसी भी समय शुभ कार्य किए जा सकते हैं। सोना-चांदी की खरीदारी, नया व्यवसाय शुरू करना या निवेश करना आज के दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
अक्षय तृतीया 2026 तिथि और शुभ समय
अक्षय तृतीया की तिथि का प्रारंभ 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से हो रहा है, जो 20 अप्रैल की सुबह 07 बजकर 27 मिनट तक प्रभावी रहेगी। इसके अलावा दिन में 01:58 से 03:35 बजे तक, शाम 06:49 से 10:57 बजे तक और रात्रि में 20 अप्रैल को 01:43 से 03:05 बजे तक विशेष शुभ समय माना गया है।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
अक्षय तृतीया को युगादि तिथि भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सतयुग का समापन और त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था। भगवान परशुराम का जन्म भी इसी दिन हुआ माना जाता है। इसके अलावा वेदव्यास ने इसी तिथि से महाभारत की रचना प्रारंभ की थी। इस दिन किए गए दान और सत्कर्मों का फल अनंत काल तक बना रहता है।
सोना-चांदी खरीदने का महत्व और परंपरा
अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा का संबंध समृद्धि और वृद्धि से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और स्थायित्व लाती हैं। यही कारण है कि लोग अपनी क्षमता के अनुसार आभूषण, सिक्के या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदते हैं।
पूजा विधि और सरल उपाय
इस दिन प्रातः स्नान के बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पीले वस्त्र, फूल, चंदन और प्रसाद अर्पित किया जाता है। सत्तू, जल और अन्न का दान विशेष रूप से शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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