रांची : बोकारो और हजारीबाग जिला ट्रेजरी से वेतन मद में हुई फर्जी निकासी के मामले की जांच अब राज्य स्तर पर व्यापक रूप लेती जा रही है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि बोकारो मामले की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद राज्य की सभी ट्रेजरी के लिए नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सके।
झारखंड सरकार के निर्देश पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित आठ सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति जांच कर रही है। समिति सबसे पहले बोकारो ट्रेजरी में वेतन मद से हुई फर्जी निकासी की जांच में जुटी है। टीम हाल ही में बोकारो दौरे पर भी गई थी, जहां ट्रेजरी और एसपी कार्यालय से जुड़े दस्तावेजों एवं प्रक्रियाओं का गहन निरीक्षण किया गया।
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम पिछले छह वर्षों से जुड़े हजारों पन्नों के दस्तावेज अपने साथ रांची लेकर आई है। इन दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच के बाद अगले सप्ताह टीम दोबारा बोकारो जाकर कई बिंदुओं पर पड़ताल करेगी। अधिकारियों का मानना है कि पहले यह समझना जरूरी है कि वेतन मद में फर्जी निकासी किस तरीके से हुई, सिस्टम में कौन-कौन सी तकनीकी खामियां थीं और किन स्तरों पर निगरानी कमजोर रही।
इसी आधार पर राज्य सरकार पूरे ट्रेजरी सिस्टम के लिए नई कार्यप्रणाली तैयार करेगी। साथ ही अन्य ट्रेजरी में जांच की दिशा भी तय की जाएगी। प्रस्तावित SOP में यह स्पष्ट किया जाएगा कि जिलों में वेतन बिल तैयार करने, उसकी जांच, अनुमोदन और भुगतान की प्रक्रिया किस प्रकार होगी। कौन अधिकारी किस स्तर पर बिल का सत्यापन करेगा, किस तरह डिजिटल और मैनुअल मिलान होगा तथा भुगतान से पहले किन दस्तावेजों की अनिवार्य जांच की जाएगी, इसकी विस्तृत व्यवस्था तय की जाएगी।
पुलिस मैनुअल का भी हो रहा अध्ययन
जांच टीम पुलिस विभाग की वेतन भुगतान प्रणाली और पुलिस मैनुअल का भी अध्ययन कर रही है, क्योंकि मामला पुलिस विभाग से संबंधित बताया जा रहा है। इसके तहत फ्लो चार्ट, मास्टर रोल, वेतन स्वीकृति प्रक्रिया और ट्रेजरी समन्वय की समीक्षा की जा रही है। विशेष रूप से मास्टर रोल व्यवस्था को लेकर भी कई तकनीकी सुधारों पर विचार किया जा रहा है।
तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों पर फोकस
उच्च स्तरीय समिति का फोकस फिलहाल तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों की पहचान पर है। समिति आपराधिक जांच नहीं करेगी, बल्कि यह देखेगी कि नियमों का पालन कितना हुआ और किन स्तरों पर उल्लंघन या लापरवाही हुई। इसके बाद समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
बता दे कि बोकारो ट्रेजरी में अब तक करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी निकासी का मामला सामने आया है, जबकि हजारीबाग ट्रेजरी में यह आंकड़ा 15 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। जांच के दौरान यह राशि और बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। महालेखाकार की आपत्ति के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का निर्णय लिया। अब बोकारो और हजारीबाग के अलावा राज्य की सभी 33 ट्रेजरी की जांच की तैयारी भी की जा रही है।
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