Jamshedpur : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के जनसुविधा प्रतिनिधि मुकुल मिश्रा ने सोमवार को टाटा लैंड के रीजनल मैनेजर प्रवीण कुमार से मुलाकात कर सोनारी, कदमा, बिष्टुपुर और साकची के टाटा लीज एरिया में रहने वाले लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों ने पानी और बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन दिया हुआ है, लेकिन अब तक उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मुकुल मिश्रा ने टाटा लैंड प्रबंधन से कहा कि वर्षों से लोग नियमित बिजली और पानी कनेक्शन के इंतजार में हैं। उन्होंने इस समस्या को गंभीर बताते हुए जल्द समाधान की मांग की। इस पर टाटा लैंड के आरएम प्रवीण कुमार ने आश्वासन दिया कि मामले पर शीघ्र विचार कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
मुकुल मिश्रा ने कंपनी प्रबंधन पर अतिक्रमण हटाने के मामले में दोहरा रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छोटे स्तर के अतिक्रमणों को हटाने के लिए कंपनी की सिक्योरिटी टीम तुरंत सक्रिय हो जाती है, जबकि बड़े अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। उनके अनुसार, बड़े लोगों को संरक्षण और छोटे लोगों पर सख्ती की नीति के कारण अवैध अपार्टमेंटों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी मांग की कि जिन लोगों ने भवन नक्शा पास कराने और एनओसी के लिए आवेदन दे रखा है, उनके मामलों की निष्पक्ष जांच की जाए। यदि आवेदन वैध पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों को शीघ्र एनओसी जारी की जाए, ताकि वे समय पर अपना आवास निर्माण कर सकें।
इस दौरान मुकुल मिश्रा के साथ शीतल खुल्लर, विनोद सिंह, काजल चौधरी और अशोक सिंह भी मौजूद रहे।
इसी क्रम में 22 और 23 मई 2026 को जमशेदपुर के मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल सभागार में पर्वत और नदियों के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। संगोष्ठी का आयोजन जलपुरुष राजेंद्र सिंह और विधायक सरयू राय के संरक्षण में किया जा रहा है। कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञ, पर्यावरणविद्, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता भाग लेंगे।
संगोष्ठी में भारतीय पर्वत संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम तथा नदियों के संरक्षण एवं पुनर्जनन अधिनियम के प्रारूपों पर चर्चा होगी। आयोजकों का कहना है कि पहाड़ों और नदियों के संरक्षण के लिए देश में ठोस और सशक्त कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस संबंध में तैयार प्रारूप भारत सरकार को सौंपे जाएंगे।
अब तक इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने के लिए न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) गोपाल गावड़ा, डॉ. पीयूष कांत पांडेय, प्रो. अंशुमाली, सिद्धार्थ त्रिपाठी (आईएफएस), डॉ. राम बूझ, दीपक परबतियार, विभूति देबरामा, बी. सत्यनारायण, संजय उपाध्याय, डॉ. एस.एन. पाठक, अधिवक्ता ए.के. कश्यप और डॉ. गोपाल शर्मा समेत कई विशेषज्ञों ने अपनी सहमति प्रदान की है।
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