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PESA Act Jharkhand : नियमावली के अनुसार पेसा कानून का संचालन कराएं, मापमा धाड़ दिशोम ने उपायुक्त से की मांग

Jharkhand Hindi News : देश परगना बाबा बैजू मुर्मू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त का किया स्वागत, ज्ञापन सौंप रखी मांग

by Rajesh Choubey
PESA Act Jharkhand
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घाटशिला : पेसा कानून को नियमावली के अनुरूप लागू करने की मांग उपायुक्त से की गई है। इस सिलसिले में माझी परगना माहाल पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था धाड़ दिशोम पूर्वी सिंहभूम के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व देश परगना बाबा बैजू मुर्मू ने किया। मुलाकात करने पहुंचे लोगों ने पहले माहाल का अंगवस्त्र देकर उपायुक्त का अभिनंदन किया।

विभाग से जारी किए जा रहे निर्देशों का किया विरोध

ज्ञापन के माध्यम से पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के अगुवाओं ने मांग की कि वर्षों पुराने मांग पेसा नियमावली झारखंड प्रदेश में लागू हो गई है। धरातल पर विस्तार करने के लिए विभाग द्वारा निर्देश जारी किया जा रहा है। इसका माझी पारगना माहाल ने विरोध करते हुए नियमावली के अनुसार पेसा कानून का संचालन करने का अनुरोध किया। सर्वप्रथम उपयुक्त के द्वारा प्रत्येक ग्राम सभा के अध्यक्ष को अनुसूचित जनजाति समुदाय के ऐसे व्यक्ति जो पारंपरिक रूप से माझी, पारगना, मुंडा, मानकी आदि नामों से जाना जाता हो ऐसे व्यक्ति को सत्यापन एवं प्रकाशन कर प्रमाण पत्र दिया जाए इसके बाद ही उनके अध्यक्षता में बैठक कर आगे की कार्य को बढ़ाया जाए।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा विरोध पत्र

इसके साथ ही आदिवासी समाज ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को एक विरोध पत्र भेजा गया। इसमें कहा गया कि हिंदूवादी संगठन जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा आगामी दिनांक 24 मई को लाल किला मैदान नई दिल्ली में आयोजित होने वाले जनजाति संस्कृत समागम का विरोध कर रहे हैं। जनजाति सुरक्षा मंच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक अंग है, इनकी मंशा आदिवासियों को जबरन हिंदू धर्म शामिल करना है। ये लोग आदिवासियों के सरना धर्म को नहीं मानते हैं। सरना और सनातन एक है, का राग अलापते हैं। आदिवासियों के शैक्षणिक, राजनितिक आरक्षण कैसे सुरक्षित रहे, कौन उनके डेमोग्राफी को बदल रहे हैं, इस पर विचार करते हुए कार्रवाई करना आवश्यक है।

आदिवासियों के खिलाफ रचा जा रहा षडयंत्र

परंतु उसके नाम पर जनजाति समुदाय को विलुप्त करने की साजिश, उनको धार्मिक व्यवस्था से दूर करना, उनके जमीन को हड़पना, सरना सनातन एक है बोलकर उनको जबरन हिंदू में धर्मांतरित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व हिंदू परिषद के षड्यंत्र को आदिवासी समाज कभी सफल नहीं होने देगा। आदिवासी जनजाति समाज प्रकृति पूजक है। इसकी अपनी रुढ़ि, प्रथा व पारंपरिक स्वसाशन व्यवस्था है। पूजा पद्धति धर्म संस्कृति अन्य समुदायों से बिल्कुल अलग है। उनके आसपास प्राकृतिक संसाधन छुपा हुआ है जहां आदिवासी है वहां जंगल है और वही संपदा है। अब कुछ दिकुओं कि गिद्ध दृष्टि आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन, धर्म संस्कृति, शैक्षणिक राजनीतिक आरक्षण पर पड़ा है। इसलिए आदिवासियों को स्वतंत्र रूप से रहने के लिए धार्मिक मान्यताओं को मानने के लिए अलग धर्म कोड का मान्यता नहीं दे रही है।

आदिवासी विरोधी मानसिकता का लगाया आरोप

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि देश में 40 लाख आबादी वाले जैनियों को धर्म को प्राप्त है मगर 2011 में जनगणना में 50 लाख सरना धर्म लिखने वाले आदिवासियों को धर्म को नहीं देकर केंद्र सरकार ने आदिवासी विरोधी मानसिकता दिखायी है। ऐसी स्थिति में जनजाति सुरक्षा मंच को मोहरा बनाकर आदिवासी समाज के भोले भाले प्रतिनिधियों को समाज में फूट डालो राज करो की नीति अपनाकर समाज के लोगों को दिग्भ्रमित करने के लिए काम कर रहे हैं। आदिवासी समाज ऐसे प्रतिनिधियों को चिन्हित कर रही है एवं आने वाले समय में उनके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

अस्तित्व के पहचान व सुरक्षा प्रदान करने ली लगाई गुहार

राष्ट्रपति के नाम प्रेषित पत्र में निवेदन किया गया कि आदिवासी जनजाति समुदाय को सरना धर्म कोड देकर सुरक्षित करें और उनके शैक्षणिक राजनीतिक आरक्षण,जल जंगल जमीन, भाषा संस्कृति, पूजा पद्धति एवं आदिवासियों का अस्तित्व पहचान की सुरक्षा करने की गुहार लगाई गई। मौके पर देश पारानिक बाबा दुर्गा चरन मुर्मू, शास्त्री हेंम्ब्रोम, रमेश मुर्मू, जगदिस बास्के, सुशांत हेंम्ब्रोम, कारु मुर्मू, मर्शाल मुर्मू, शत्रुघ्न मुर्मू, आदि संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

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