Kolkata : कभी जंगलमहल से लेकर झारखंड, बिहार और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख चेहरा रहीं महिला नक्सली नेता पुष्पा उर्फ शकुंतला ने आखिरकार हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर लिया है। करीब 25 वर्षों तक भूमिगत जीवन बिताने के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ने की घोषणा की।
बुधवार को कोलकाता पुलिस आयुक्त कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पुष्पा उर्फ शकुंतला ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। इस दौरान उन्होंने अपना हथियार जमा करते हुए शांतिपूर्ण जीवन अपनाने की प्रतिबद्धता जताई। सुरक्षा एजेंसियां इस आत्मसमर्पण को जंगलमहल और झारखंड क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता मान रही हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर के बेलपहाड़ी क्षेत्र की रहने वाली पुष्पा वर्ष 2001 में उस समय माओवादी संगठन से जुड़ी थीं, जब वह पांचवीं कक्षा की छात्रा थीं। शुरुआत में उन्होंने संगठन की सांस्कृतिक इकाई में काम किया और गीत, पर्चों तथा प्रचार सामग्री के माध्यम से माओवादी विचारधारा के प्रसार में भूमिका निभाई। बाद में संगठन में उनका प्रभाव बढ़ता गया और वह सशस्त्र दस्तों की महत्वपूर्ण सदस्य बन गईं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पुष्पा लंबे समय तक झारखंड, बिहार और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रहीं। संगठन के विस्तार और कई अभियानों में उनकी अहम भूमिका रही। बाद में माओवादी नेता मिसिर बेसरा के निर्देश पर उनकी गतिविधियां सारंडा के जंगलों तक फैल गई थीं। कोलकाता पुलिस के संयुक्त आयुक्त अजय नंद के अनुसार, शकुंतला दलमा स्क्वॉड की जोनल कमेटी सदस्य थीं और वर्ष 2001 से संगठन में सक्रिय थीं।
आत्मसमर्पण के बाद मीडिया से बातचीत में पुष्पा ने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति, आवास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं ने उन्हें नया जीवन शुरू करने का साहस दिया। उन्होंने अपने पुराने साथियों से भी हथियार छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा और बंदूक के रास्ते में कोई भविष्य नहीं है तथा सामान्य और शांतिपूर्ण जीवन ही सबसे बेहतर विकल्प है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुष्पा उर्फ शकुंतला का आत्मसमर्पण जंगलमहल, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में बचे हुए माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि माओवादी नेता मिसिर बेसरा अब भी सारंडा के जंगलों में अपने कुछ सहयोगियों के साथ सक्रिय है और उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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