जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में शिक्षा विभाग की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। अभी तक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी। लेकिन, अब अधिकारियों का भी टोटा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले के 11 शिक्षा प्रखंड वर्तमान में सिर्फ एक प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की लचर व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्वीकृत 11 पदों में से 10 पद खाली पड़े हैं। वर्तमान में जमशेदपुर प्रखंड-2 की बीईईओ तेजींदर कौर को सभी 10 अतिरिक्त प्रखंडों का प्रभार सौंपा गया है। ऐसे में पूरे जिले की शैक्षणिक निगरानी, योजनाओं का क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय का जिम्मा अकेले उन्हीं पर है। स्थिति को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि तेजींदर कौर अगले छह महीनों में सेवानिवृत्त होने वाली हैं। उनके रिटायर होते ही जिले की शिक्षा व्यवस्था के पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे छात्रों और शिक्षकों पर सीधा असर पड़ेगा।
वहीं पूर्वी सिंहभूम से अधिक खराब स्थिति पश्चिमी सिंहभूम जिले की है, वहां बीईईओ के कुल 18 पद है और सभी खाली है। जबकि सरायकेला खरसावां में बीईईओ का कुल 10 पद है और इसमें से 8 पद रिक्त है। इस प्रकार कोल्हान के तीनों जिलों में बीईईओ के कुल 39 पद है इसमें तीन बीईईओ ही कार्यरत है, जबकि 36 पद रिक्त हैं।
प्रभावित हो रहे महत्वपूर्ण कार्य
झारखंड शिक्षा विभाग में अधिकारियों की भारी कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। सबसे अधिक असर वेतन भुगतान पर देखा जा रहा है, जहां शिक्षकों और कर्मियों को महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा विद्यालय अनुश्रवण भी कमजोर पड़ा है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता और मध्याह्न भोजन योजना की नियमित जांच नहीं हो पा रही है। सरकारी योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन नहीं होने से छात्रों तक उनका लाभ भी नहीं पहुंच पा रहा है। प्रखंड स्तर पर कार्यालयीन कार्यों में देरी, फाइलों के निष्पादन में बाधा और जिला शिक्षा कार्यालय के साथ समन्वय की कमी स्थिति को और जटिल बना रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) की भूमिका जमीनी शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है, जिसकी कमी पूरे तंत्र को प्रभावित कर रही है।
ये काम होते हैं बीईईओ के जिम्मे, जो हो रहे प्रभावित
- बीईईओ प्राथमिक और मध्य विद्यालयों का नियमित निरीक्षण कर शिक्षा के स्तर को सुनिश्चित करते हैं।
- विद्यालय और जिला शिक्षा कार्यालय के बीच ये एक महत्वपूर्ण सेतु हैं। शिक्षकों की उपस्थिति, अवकाश प्रबंधन और
- अनुशासनात्मक कार्रवाई में इनकी भूमिका निर्णायक होती है।
- केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं (जैसे- आरटीई, समग्र शिक्षा अभियान, डीबीटी) को सीधे स्कूलों तक पहुंचाना और उसका ऑडिट करना।
- स्थानीय स्तर पर शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों की शिकायतों का त्वरित निवारण करना।
- शिक्षकों के वेतन निकासी पदाधिकारी भी बीईईओ ही होते हैं
- किताब, पोशाक व साइकिल वितरण सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी
- दिव्यांग बच्चों के लिए समावेसी शिक्षा संचालित कर सामग्री वितरण करना है
| जिले का नाम | कुल पद | कार्यरत | रिक्त |
|---|---|---|---|
| पूर्वी सिंहभूम | 11 | 01 | 10 |
| पश्चिमी सिंहभूम | 18 | 00 | 18 |
| सरायकेला-खरसावां | 10 | 02 | 08 |
यह सही है कि राज्य में बीईईओ का पद बड़ी संख्या में रिक्त है और उससे काम प्रभावित हो रहा है, क्योंकि प्रखंड स्तर पर स्कूलों की मॉनिटरिंग उनकी जिम्मेदारी होती है। लेकिन सरकार जल्द इन पदों को भरने जा रही। ऐसे में रिक्ति की यह समस्या बहुत दिनों तक नहीं रहने वाली है।
– उमाशंकर सिंह, शिक्षा सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग

