
Jamtara : करीब 18 वर्षों बाद जामताड़ा एक बार फिर बड़े पुलिस एनकाउंटर का गवाह बना। रविवार रात साहिबगंज-गोविंदपुर हाईवे पर टाउन थाना क्षेत्र के सुपायडीह गांव के समीप पुलिस मुठभेड़ में कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मौत हो गई। इस घटना ने न केवल राज्य में अपराध नियंत्रण को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है, बल्कि वर्ष 2008 के आसपास मिहिजाम के खालसा होटल में हुए चर्चित भोला पांडेय एनकाउंटर की याद भी ताजा कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, सुजीत सिन्हा को साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद सेंट्रल जेल ले जाया जा रहा था। रात करीब 10 बजे रास्ते में पुलिस वाहन का टायर पंचर हो गया। इसी दौरान सुजीत सिन्हा ने कथित तौर पर पुलिस अभिरक्षा से भागने का प्रयास किया और एक जवान की इंसास रायफल छीन ली। पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग में उसे गोली लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह, अनुमंडल पदाधिकारी अनंत कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। सुरक्षा कारणों से साहिबगंज-गोविंदपुर हाईवे पर रातभर यातायात डायवर्ट रखा गया। रांची से एफएसएल टीम के पहुंचने का इंतजार होने के कारण करीब आठ घंटे तक शव घटनास्थल पर ही पड़ा रहा। इस दौरान पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर जांच प्रक्रिया जारी रखी।
खालसा होटल एनकाउंटर के बाद पहली बड़ी मुठभेड़
जामताड़ा में इससे पहले वर्ष 2008 के आसपास मिहिजाम स्थित खालसा होटल में पुलिस और कुख्यात अपराधी भोला पांडेय के बीच मुठभेड़ हुई थी। उस कार्रवाई के बाद जिले में किसी बड़े पुलिस एनकाउंटर की घटना सामने नहीं आई। ऐसे में सुजीत सिन्हा का एनकाउंटर जामताड़ा की सबसे बड़ी पुलिस कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
झारखंड के संगठित अपराध का बड़ा चेहरा था सुजीत सिन्हा
सुजीत सिन्हा का नाम लंबे समय से झारखंड के संगठित अपराध जगत में सक्रिय अपराधियों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, हथियार तस्करी, शस्त्र अधिनियम समेत 75 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। शुरुआती दौर में वह दिवंगत गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव गिरोह से जुड़ा था, लेकिन बाद में उसने अपना अलग नेटवर्क तैयार कर कई जिलों में रंगदारी का समानांतर तंत्र विकसित किया। पुलिस के लिए वह लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ था।
जांच रिपोर्ट पर टिकी रहेंगी निगाहें
पुलिस ने पूरे घटनाक्रम को आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई बताया है। हालांकि, एनकाउंटर से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि एफएसएल रिपोर्ट, बैलिस्टिक जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर होगी। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम किन परिस्थितियों में हुआ और पुलिस की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप थी या नहीं।
क्यों चर्चा में है यह एनकाउंटर?
*करीब 18 साल बाद जामताड़ा में बड़ा पुलिस एनकाउंटर।
* साहिबगंज से धनबाद जेल शिफ्टिंग के दौरान हुई घटना।
* पुलिस का दावा- टायर पंचर होने के बाद आरोपी ने भागने और रायफल छीनने की कोशिश की।
* जवाबी फायरिंग में गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मौत।
* एफएसएल टीम के इंतजार में करीब आठ घंटे तक घटनास्थल पर पड़ा रहा शव।
* खालसा होटल में भोला पांडेय एनकाउंटर के बाद जिले की पहली बड़ी पुलिस मुठभेड़।
* मामले की सच्चाई अब एफएसएल और अन्य जांच रिपोर्ट से और स्पष्ट होगी।

