
रांची : बोकारो की लापता युवती मामले की पूरी कहानी अब डीएनए रिपोर्ट पर टिकी है। जंगल से बरामद कंकाल और युवती के माता-पिता के डीएनए नमूनों के मिलान संबंधी रिपोर्ट केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल), कोलकाता से झारखंड हाई कोर्ट पहुंच गई है। मामले की जांच में लापरवाही को लेकर पिंजराजोड़ा थाना प्रभारी समेत 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड हो चुके हैं। सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत डीएनए रिपोर्ट का झारखंड उच्च न्यायालय ने अवलोकन किया। अगली सुनवाई अब 25 जून को होगी।
मंगलवार को मामले की सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ में हुई। इस दौरान विशेष जांच दल (एसआईटी) की टीम भी न्यायालय में उपस्थित रही।
न्यायालय में पेश की गई सीएफएसएल रिपोर्ट
पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता को डीएनए परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। मंगलवार को सीएफएसएल की रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष पेश की गई। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और शांतनु गुप्ता ने पक्ष रखा।
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आरोपित दिनेश महतो को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह भी बताया गया कि लापता युवती का कंकाल बोकारो के एक जंगल से बरामद किया गया था, जिसके बाद उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए जांच कराई गई।
जांच के दौरान लापरवाही सामने आने पर बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने पिंडराजोड़ा थाना प्रभारी सहित कुल 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मामले की जांच में कथित लापरवाही और संवेदनशीलता की कमी को लेकर की गई है।
लापता युवती की मां ने अपनी बेटी की बरामदगी के लिए झारखंड उच्च न्यायालय में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। युवती 31 जुलाई 2025 से लापता थी। बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147/2025 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
डीएनए रिपोर्ट आने के बाद मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में नया मोड़ आने की संभावना है। अब सभी की निगाहें 25 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मामले में आगे की कार्रवाई और जांच की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।
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