
Ranchi : झारखंड राज्यसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को एक सीट पर मिली हार के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गठबंधन को लेकर बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में राज्य में गठबंधन सरकार का नया स्वरूप देखने को मिल सकता है। साथ ही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर भी कार्रवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही लेंगे।
सोमवार को झामुमो के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा था कि राज्यसभा चुनाव में धनबल का खेल हुआ है। इसके बावजूद इंडिया गठबंधन के 50 विधायक चट्टानी एकता के साथ खड़े रहे और मजबूती से चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि आज भी 50 विधायक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़े हैं, जबकि शेष 30 विधायक भाजपा के साथ हैं।
सुप्रियो भट्टाचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या झामुमो गठबंधन में शामिल कुछ सहयोगी दलों के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हार केवल कांग्रेस उम्मीदवार की नहीं बल्कि पूरे इंडिया गठबंधन की हार मानी जा रही है। बहुमत का आंकड़ा होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी की हार ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्यसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद कांग्रेस ने खुलकर आरोप लगाया था कि राजद और माले ने गठबंधन के साथ विश्वासघात किया है। कांग्रेस का कहना था कि झामुमो और कांग्रेस के विधायकों ने पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन मतदान के दौरान कुछ सहयोगी दलों के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को फायदा पहुंचाया।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा था कि इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अब झामुमो की ओर से आए सख्त संकेतों ने इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है।
गौरतलब है कि झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान हुआ था। चुनावी मुकाबले में झामुमो के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी मैदान में थे। एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी। गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन होने के कारण झामुमो और कांग्रेस दोनों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही थी।
हालांकि मतदान के बाद आए नतीजों ने सभी को चौंका दिया। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले, जिनमें 16 कांग्रेस और 4 झामुमो विधायकों के वोट शामिल बताए गए। इसके बाद राजद और माले पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे और गठबंधन के भीतर अविश्वास की स्थिति पैदा हो गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या झामुमो क्रॉस वोटिंग के मामले में कोई कठोर राजनीतिक फैसला लेगी और क्या राजद को गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

