
रांची : झारखंड में 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके मनरेगा कर्मियों को ग्रेड-पे के दायरे में लाने की दिशा में ग्रामीण विकास विभाग ने पहल तेज कर दी है। इस संबंध में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों और झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में सहमति बनने के बाद प्रक्रिया तेज की गयी है। विभाग ने इस संबंध में सहमति पत्र भी जारी कर दिया है।
इसके तहत मनरेगा के तहत क्षेत्रीय स्तर पर / पदों पर कार्यरत ऐसे कर्मी, जिन्होंने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें ग्रेड पे के दायरे में लाने के लिए विभागीय स्तर पर एक माह के भीतर संचिका तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। वित्त विभाग की भी सहमति ली जाएगी।
ग्रेड-पे के दायरे में आने के बाद मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत बीपीओ, रोजगार सेवक, लेखा सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, अभियंताओं की मानदेय में बड़ी वृद्धि होगी।
हड़ताल अवधि के मानदेय पर निर्णय समीक्षा के बाद
बैठक में हड़ताल अवधि के मानदेय भुगतान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। विभाग ने इस मामले में समीक्षा के बाद निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
मृत मनरेगा कर्मियों के आश्रितों को नियुक्ति में वरीयता
इसके अलावा सेवा काल के दौरान मृत मनरेगा कर्मियों के वैध आश्रितों को जिला स्तर पर मनरेगा के सृजित पदों पर नियुक्ति में वरीयता अथवा प्राथमिकता देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। इस पर विभागीय समीक्षा के बाद आगे कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है।
आखिर क्यों हड़ताल पर गए थे मनरेगा कर्मी
झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मार्च 2026 से 2025 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी।
हड़ताल करीब 100 दिनों से अधिक तक चली। 19 जून 2026 को सरकार के साथ हुई वार्ता के बाद समाप्त हुई।
कर्मियों की प्रमुख मांगों में ग्रेड-पे लागू करना, सेवा नियमितीकरण, हड़ताल अवधि का मानदेय भुगतान, मृत कर्मियों के आश्रितों को नियुक्ति में प्राथमिकता तथा अन्य सेवा संबंधी सुविधाएं शामिल थीं।19 जून को हुई बैठक में कई मांगों पर सकारात्मक सहमति बनने के बाद संघ ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की थी।

