
Ranchi : राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को उम्मीद से कम वोट मिलने के बाद पार्टी के भीतर मंथन का दौर अभी भी जारी है। शुरुआत में कांग्रेस ने सहयोगी दलों के कुछ विधायकों पर क्रॉस वोटिंग का संदेह जताया था, लेकिन अब पार्टी के अंदर ही तस्वीर बदलती नजर आ रही है। ताजा चर्चाओं में कांग्रेस के अपने ही कुछ विधायकों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के चार और वामपंथी दलों के दो विधायकों पर कांग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं देने का आरोप लगाया गया था। यह आरोप प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने भी सार्वजनिक रूप से उठाया था और संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
हालांकि, अब पार्टी के भीतर नई चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों का दावा है कि माले (भाकपा-माले) के विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। ऐसे में शक की सुई अब कांग्रेस के ही कुछ विधायकों की ओर घूमती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में एक रिपोर्ट पार्टी आलाकमान तक भी पहुंच चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती स्तर पर कांग्रेस के दो आदिवासी विधायकों को संदेह के घेरे में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी का कोई भी नेता खुलकर किसी का नाम लेने को तैयार नहीं है। वहीं, भाकपा-माले के विधायकों को अब धीरे-धीरे क्लीन चिट मिलने लगी है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी इस विवाद को ज्यादा तूल देने के पक्ष में नहीं दिख रहा है, क्योंकि इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पहले ही आलोचना झेल चुकी है।
इधर, जिन आदिवासी विधायकों पर संदेह जताए जाने की चर्चा है, उनके बीच भी नाराजगी की संभावना व्यक्त की जा रही है। यदि मामला आगे बढ़ता है तो इससे पार्टी के अंदर असंतोष और बढ़ सकता है।
इस बीच, राज्यसभा चुनाव परिणाम आए 12 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से अब तक कोई औपचारिक समीक्षा बैठक नहीं हुई है। न तो किसी दल ने अलग से चुनावी परिणामों की समीक्षा की और न ही गठबंधन स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा हुई।
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद शुरुआती दिनों में सहयोगी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, लेकिन बाद में सभी दलों ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली। राजद की ओर से पलटवार के बाद कांग्रेस भी इस मामले में शांत हो गई। झामुमो ने समीक्षा की बात जरूर कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल सामने नहीं आई।
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