
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के चिड़िया और गंगदा पंचायत क्षेत्र में औद्योगिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के मनोहरपुर लौह अयस्क खदान प्रबंधन पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए छह गांवों के आदिवासियों और ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ‘संयुक्त ग्रामसभा परिषद चिड़िया’ के नेतृत्व में ग्रामीणों ने आगामी 8 जुलाई से पूर्ण आर्थिक नाकाबंदी (चक्का जाम) और माइंस के कामकाज को ठप करने की आधिकारिक चेतावनी दी है।
वार्ता बेअसर, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के शिक्षित और बेरोजगार युवाओं को नौकरी देने, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और पीने का साफ पानी मुहैया कराने जैसी बुनियादी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इस सिलसिले में बीते 4 जून को एक मांग पत्र सौंपा गया था, जिसके बाद 15 जून को स्थानीय विधायक जगत माझी की मध्यस्थता में प्रबंधन के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी हुई थी। आरोप है कि उस बैठक में प्रबंधन ने जल्द ही सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया था, लेकिन हफ़्तों बीत जाने के बाद भी न तो गांवों के पारंपरिक प्रधानों (मुंडाओं) को चर्चा के लिए बुलाया गया और न ही मांगों पर कोई अमल हुआ।
अल्टीमेटम की अवधि समाप्त, आंदोलन की तैयारी
संयुक्त ग्रामसभा परिषद द्वारा प्रबंधन को दिया गया 7 दिनों का अल्टीमेटम खत्म हो चुका है। अब ग्रामीणों ने सीधे तौर पर प्रशासनिक और माइंस महाप्रबंधक को पत्र भेजकर अपने कड़े रुख से अवगत करा दिया है।
8 जुलाई से चक्का जाम, खदानों में खनन कार्य पूरी तरह रोक
8 जुलाई की सुबह 10 बजे से ग्रामीण मुख्य परिवहन मार्गों को पूरी तरह जाम कर देंगे। इसके साथ ही खदानों में खनन कार्य पूरी तरह रोक दिया जाएगा और प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव किया जाएगा।
परिषद ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब वे खोखले आश्वासनों के झांसे में नहीं आने वाले हैं। जब तक धरातल पर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की घोषणा नहीं होती, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन के दौरान पैदा होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए सीधे तौर पर सेल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा।

