
पलामू : झारखंड के पलामू जिला अंतर्गत पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव में एक ही परिवार में लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को देर रात परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य लाखो देवी की रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही इस परिवार में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। वहीं परिवार का एक अन्य सदस्य सुनील मेहता अभी भी गंभीर हालत में रिम्स में भर्ती है, जहां उसका उपचार जारी है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच के आधार पर पूरा परिवार ड्रॉप्सी नामक बीमारी से प्रभावित प्रतीत हो रहा है। हालांकि, मौतों के वास्तविक कारण की अंतिम पुष्टि बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
पलामू मौत मामला : 19 जून से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला
सिक्का गांव में इस परिवार की पहली मौत 19 जून को हुई थी, जब कुलदीप मेहता ने दम तोड़ दिया। इसके अगले दिन 20 जून को उनकी बेटी बबीता कुमारी की मौत हो गई। इसके बाद 26 जून को दूसरी बेटी इंदु कुमारी, 28 जून को बहू श्वेता कुमारी और 29 जून को बेटे नकुल मेहता की भी मृत्यु हो गई।
अब परिवार की बुजुर्ग सदस्य लाखो देवी की मौत के बाद इस परिवार में 6 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार हुई इन मौतों ने पूरे इलाके में चिंता और भय का माहौल बना दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी, गांव में दोबारा होगा सर्वे
पाटन के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार ने बताया कि लाखो देवी की मौत की सूचना प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग लगातार पूरे गांव की निगरानी कर रहा है और पहले भी स्वास्थ्य सर्वे कराया गया था। प्रारंभिक सर्वेक्षण में इस परिवार के अलावा गांव का कोई अन्य व्यक्ति समान लक्षणों से प्रभावित नहीं मिला। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर पूरे गांव का दोबारा स्वास्थ्य सर्वे कराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारी और मौत के कारणों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
ड्रॉप्सी बीमारी की आशंका, सरसों के तेल में मिला आर्गेमोन तेल
स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह संकेत मिले हैं कि पूरा परिवार ड्रॉप्सी बीमारी से पीड़ित है। अधिकारियों के अनुसार, परिवार जिस सरसों तेल का उपयोग कर रहा था, उसकी जांच में आर्गेमोन मेक्सिकाना का तेल मिला था। रांची के नामकुम स्थित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला ने सरसों तेल में आर्गेमोन (कटैला बीज के तेल) की मिलावट की पुष्टि की है। इसी आधार पर चिकित्सक प्रभावित लोगों का उपचार ड्रॉप्सी बीमारी के अनुरूप कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही जारी किया जाएगा।
क्या है ड्रॉप्सी बीमारी
ड्रॉप्सी एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है, जो सामान्यतः आर्गेमोन तेल से मिलावटी खाद्य तेल के सेवन से हो सकती है। इस स्थिति में शरीर में सूजन, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, त्वचा और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याएं तथा अन्य गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। भारत में इस तरह के मामले बेहद दुर्लभ हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद इस प्रकार का यह पहला संदिग्ध मामला सामने आया है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
क्या है आर्गेमोन मेक्सिकाना
आर्गेमोन मेक्सिकाना एक कांटेदार खरपतवार है, जो झारखंड के पलामू सहित कई क्षेत्रों में पाया जाता है। स्थानीय भाषा में इसे कटैला या पीला धतूरा भी कहा जाता हैइस पौधे के बीजों से निकला तेल मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माना जाता है। खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला के अनुसार, इसका उपयोग खाद्य तेल के रूप में नहीं किया जाता और इसकी मिलावट गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की वैज्ञानिक जांच कर रहा है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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