
रांची : झारखंड में लंबी हड़ताल के बाद सरकार और झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के बीच हुए समझौते को लागू करने की दिशा में ग्रामीण विकास विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने राज्य के सभी उपायुक्त-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक और उपविकास आयुक्त को पत्र भेजकर ऐसे मनरेगा कर्मियों की सूची मांगी है, जिन्होंने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। इन कर्मियों का ग्रेड-पे आधारित मानदेय निर्धारित किया जाएगा।
विशेष कार्य पदाधिकारी ब्रजेंद्र हेमरोम द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 19 जून 2026 को ग्रामीण विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में मनरेगा कर्मचारी संघ के साथ हुई वार्ता में इस संबंध में सैद्धांतिक सहमति बनी थी। उसी निर्णय के आलोक में अब जिलों से पात्र कर्मियों का ब्योरा मांगा गया है।
विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि एक पखवाड़े के भीतर निर्धारित प्रपत्र में कर्मियों का नाम, पद, नियुक्ति तिथि तथा यह विवरण उपलब्ध कराएं कि संबंधित कर्मी ने 10 वर्ष की सेवा पूरी की है या नहीं।
ग्रेड-पे आधारित मानदेय का लाभ ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर (बीपीओ), सहायक अभियंता (एई), कनीय अभियंता (जेई), लेखा सहायक, कंप्यूटर सहायक तथा ग्राम रोजगार सेवक (जीआरएस) समेत मनरेगा के विभिन्न संविदा पदों पर कार्यरत कर्मियों को मिलेगा। राज्य में ऐसे लगभग 5000 मनरेगा कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या लंबे समय से सेवा दे रही है।
गौरतलब है कि अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मनरेगा कर्मी 100 दिनों से अधिक समय तक हड़ताल पर रहे थे। हड़ताल समाप्त कराने के लिए सरकार और कर्मचारी संघ के बीच कई दौर की वार्ता हुई थी। 19 जून को हुई बैठक में ग्रेड-पे आधारित मानदेय लागू करने पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी। अब जिलों से पात्र कर्मियों का ब्योरा मांगने के साथ ही इस फैसले को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कर्मचारी संघ का मानना है कि ग्रेड-पे आधारित मानदेय लागू होने से लंबे समय से सेवा दे रहे मनरेगा कर्मियों को आर्थिक लाभ मिलेगा और उनके मानदेय में अनुभव के अनुरूप बढ़ोतरी का रास्ता खुलेगा।

