
Jamshedpur : देश की प्रमुख ऊर्जा कंपनी टाटा पावर ने वर्ष 2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व और 10 हजार करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ का लक्ष्य निर्धारित किया है। सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार के बाद अब कंपनी परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी कदम रखने की तैयारी में है।
टाटा समूह के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनी बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के सभी क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। इसी रणनीति के तहत ओडिशा में 10 गीगावाट क्षमता का नया सोलर उपकरण निर्माण प्रोजेक्ट स्थापित किया जाएगा, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
वर्तमान में तमिलनाडु और बेंगलुरु स्थित संयंत्रों के जरिए कंपनी के पास 4.9 गीगावाट सौर क्षमता है। टाटा पावर का लक्ष्य 2030 तक कुल 30 गीगावाट उत्पादन क्षमता हासिल करना है, जिसमें 20 गीगावाट ग्रीन एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट होंगे।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीर सिन्हा ने बताया कि टाटा पावर स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) तकनीक के जरिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश करेगी। इसके लिए न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआईएल) के साथ मिलकर योजना तैयार की जा रही है।
योजना के तहत 220-220 मेगावाट क्षमता वाले दो छोटे परमाणु रिएक्टर लगाए जाएंगे। परियोजना के लिए जमीन और तकनीकी परीक्षण को लेकर तीन राज्यों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। अगले छह महीनों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर सरकारी मंजूरी के लिए भेजने की तैयारी है।
परमाणु ऊर्जा से कैसे बनती है बिजली?
परमाणु बिजली उत्पादन में यूरेनियम या प्लूटोनियम जैसे भारी तत्वों के परमाणुओं का नियंत्रित विखंडन किया जाता है। इस प्रक्रिया से निकलने वाली अत्यधिक ऊष्मा से पानी को भाप में बदला जाता है। उच्च दबाव की यह भाप टरबाइन घुमाती है, जिससे जनरेटर बिजली का उत्पादन करता है। यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन के बिना लगातार स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम मानी जाती है।
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