Home » Chaibasa News : शिबू सोरेन की प्रतिमा का विरोध झारखंड आंदोलन के इतिहास का अपमान : बुधराम लागुरी

Chaibasa News : शिबू सोरेन की प्रतिमा का विरोध झारखंड आंदोलन के इतिहास का अपमान : बुधराम लागुरी

स्थानीय शहीदों के सम्मान के नाम पर दिशोम गुरु के योगदान को नकारना दुर्भाग्यपूर्ण

by Hari Shankar Gope
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

चाईबासा : चाईबासा में पद्मश्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा स्थापित किए जाने के विरोध में ईचा-खरकई बांध विरोधी संघ के अध्यक्ष सह अधिवक्ता बीरसिंह बुड़िउली द्वारा दिए गए बयान पर झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना का विरोध करना स्थानीय वीर शहीदों के सम्मान की बात नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन के इतिहास और झारखंड निर्माण में दिशोम गुरु के योगदान को राजनीतिक चश्मे से देखने का प्रयास है।

झारखंड आंदोलन को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने में उनका योगदान अविस्मरणीय

बुधराम लागुरी ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने झारखंड अलग राज्य के निर्माण के लिए अपना पूरा जीवन संघर्ष में समर्पित कर दिया। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को गांव-गांव तक पहुंचाया और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की आवाज को बुलंद किया। झारखंड आंदोलन को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। ऐसे महान जननायक की प्रतिमा चाईबासा में स्थापित होना पूरे कोल्हान के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि कोल्हान की धरती वीर शहीदों, क्रांतिकारियों, समाज सुधारकों और महापुरुषों की धरती है।

पोटो हो सहित अन्य वीर शहीदों और महान विभूतियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता

पोटो हो सहित अन्य वीर शहीदों और महान विभूतियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। स्थानीय शहीदों और महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने और उनके इतिहास को संरक्षित करने की मांग का झामुमो स्वागत करता है। लेकिन किसी एक महापुरुष के सम्मान को दूसरे महापुरुष के सम्मान के विरोध में खड़ा करना उचित नहीं है। झामुमो जिला प्रवक्ता ने कहा कि यदि बीरसिंह बुड़िउली वास्तव में स्थानीय वीर शहीदों और महापुरुषों के सम्मान को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए सकारात्मक पहल करनी चाहिए। इसके लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा का विरोध करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या चाईबासा में स्थानीय शहीदों की प्रतिमा स्थापित होने से दिशोम गुरु की प्रतिमा का महत्व कम हो जाएगा? निश्चित रूप से ऐसा नहीं है।

राजनीतिक विरोध के बजाय सकारात्मक सोच के साथ आगे आएं

बुधराम लागुरी ने कहा कि झामुमो स्थानीय वीर शहीदों और महापुरुषों के सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पार्टी का मानना है कि कोल्हान के सभी वीर सपूतों को उचित सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन और स्थानीय शहीदों के सम्मान को आमने-सामने खड़ा करना समाज को बांटने वाली सोच है। उन्होंने बीरसिंह बुड़िउली से अपील करते हुए कहा कि वे राजनीतिक विरोध के बजाय सकारात्मक सोच के साथ आगे आएं और स्थानीय शहीदों एवं महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित कराने के लिए आंदोलन करें। झारखंड के निर्माण में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के योगदान को कोई नकार नहीं सकता। चाईबासा में उनकी प्रतिमा स्थापित होना झारखंड आंदोलन के इतिहास को सम्मान देने के समान है और इसका विरोध किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

Read Also Chaibasa News : आदिवासी हो समाज युवा महासभा ने दिशोम गुरु की प्रतिमा स्थापित करने पर जताई आपत्ति, स्थानीय वीर शहीदों की प्रतिमा स्थापित करने की मांग

Related Articles