
रांची : ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार के जिला और प्रखंड कार्यालयों में बाहरी स्रोत यानी आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे कंप्यूटर सहायकों और एमटीएस के मानदेय तथा उनकी जरूरत की अब समीक्षा होगी। विभाग ने इसको लेकर मनरेगा आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। समिति यह आकलन करेगी कि मौजूदा व्यवस्था में कितने आउटसोर्स कर्मियों की वास्तव में जरूरत है और उनकी सेवा आगे किस स्वरूप में जारी रखी जाए।
विभागीय स्तर पर गठित समिति में ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अलावा रांची और लोहरदगा के उप विकास आयुक्त को भी शामिल किया गया है। समिति वित्त विभाग के झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट (आउटसोर्सिंग) मैनुअल-2025 के प्रावधानों के साथ विभाग के पूर्व के आदेशों और वर्तमान जरूरतों का मिलान करेगी। इसके बाद कर्मियों की संख्या, उनकी उपयोगिता और मानदेय को लेकर अपनी अनुशंसा देगी।
ग्रामीण विकास विभाग के जिला और प्रखंड कार्यालयों में कंप्यूटर सहायकों की भूमिका योजनाओं से संबंधित आंकड़ों को ऑनलाइन दर्ज करने, सरकारी पोर्टल पर रिपोर्टिंग, लाभुकों का डाटा तैयार करने और विभिन्न योजनाओं की ऑनलाइन निगरानी में महत्वपूर्ण है। वहीं एमटीएस कर्मी कार्यालयों के दैनिक कामकाज और अन्य सहायक कार्यों में सहयोग करते हैं। ग्रामीण विकास की योजनाओं का काम लगातार ऑनलाइन और डाटा आधारित होने के कारण कंप्यूटर सहायकों की जरूरत भी कई स्तरों पर बनी हुई है।
12 जुलाई को हुआ था विधानसभा घेराव
इधर, आउटसोर्स कर्मियों की सेवा व्यवस्था और मानदेय का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। विगत 12 जुलाई को ग्रामीण विकास विभाग समेत विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों ने विधानसभा का घेराव किया था। इस दौरान कर्मियों ने सरकार के विभिन्न निर्णयों पर आपत्ति जताई थी। खास तौर पर ग्रेड पे 2400 से घटाकर 1900 किए जाने का विरोध करते हुए इसे वापस 2400 करने की मांग उठाई गई थी।
आउटसोर्स कर्मियों की ओर से मानदेय और सेवा शर्तों में सुधार की मांग भी लगातार उठाई जाती रही है। ऐसे में विभाग की ओर से गठित समिति की समीक्षा को कर्मियों की सेवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अभी संख्या स्पष्ट नहीं
हालांकि विभाग ने फिलहाल जिला और प्रखंड कार्यालयों में कार्यरत आउटसोर्स कंप्यूटर सहायकों और एमटीएस की कुल संख्या का कोई अंतिम आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। समिति की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विभाग को कितने कर्मियों की जरूरत है और उनके मानदेय एवं सेवा व्यवस्था को लेकर सरकार क्या फैसला लेती है। समिति की अनुशंसा के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


