
घाटशिला : नदी का बढ़ा जलस्तर देखने पहुंचनेवालों को दूर तक इस बात का अहसास ही नहीं रहा होगा कि ऐसा हादसा होगा जिसे वे जिंदगी में कभी भुला नहीं सकेंगे। अनियंत्रित कार कुछ इस तरह भीड़ में घुसी कि कुछ लोग चपेट में आ गए, कुछ छिटक गए और अपनी बेटी के साथ नदी किनारे खड़े सुष्मिता सिन्हा ने नदी में छलांग लगा दी या गिर गई। शाम आठ बजे के करीब हुए इस हादसे के बाद पांच घंटे तक वह नदी की तेज धार में खुद को बचाने के लिए जंग लड़ती रही। काफी प्रयास के बाद आखिरकार सुष्मिता को रेस्क्यू भी कर लिया गया लेकिन सबसे दुखद पहलू यह रहा कि कार की चपेट में आने से उनकी छह साल की बेटी श्रेया सिन्हा की मौत हो गई।
घटनास्थल से एक किलोमीटर दूर रात एक बजे निकाला गया बाहर
रात करीब आठ बजे अमायानगर में यह हादसा हुआ था। हादसे के बाद नदी के तेज बहाव में गोपालपुर निवासी सुष्मिता सिन्हा बहने लगीं। इस दौरान उन्होंने झाड़ियों को पकड़कर खुद को बचाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों को काफी देर तक उनकी आवाज भी सुनाई देती रही। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और रात में ही रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया। रात गुजरते जाने के बावजूद तलाश करने का काम लगातार जारी रहा।
पांच घंटे बाद हरिंदुकरी में मिली सफलता
करीब पांच घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद सुष्मिता सिन्हा का पता हरिंदुकरी में चला। घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर उन्हें रेस्क्यू कर नदी से बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। वहीं, इस हादसे में कुल पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनका इलाज टीएमएच अस्पताल में चल रहा है। हादसे के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
श्रेया की मौत से परिवार में मातम
सबसे दुखद बात यह है कि इस हादसे में महज 6 वर्ष की श्रेया सिन्हा की जान चली गई। श्रेया सिन्हा किडजी स्कूल की छात्रा थीं। श्रेया के निधन की खबर से परिवार में मातम पसरा हुआ है। अमायानगर से हरिंदुकरी तक नदी के तेज बहाव में करीब एक किलोमीटर तक बहने और पांच घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान ने इस पूरी घटना को बेहद दर्दनाक बना दिया है। स्थानीय लोगों और पुलिस प्रशासन की सक्रियता से सुष्मिता सिन्हा को समय रहते नदी से बाहर निकाला जा सका। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस प्रशासन मामले की जानकारी जुटा रहा है और घायलों के इलाज पर भी नजर रखी जा रही है।

