
Jamshedpur : प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोलकाता जोन-1 ने गुरुवार को करीब 290 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कोलकाता के 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई कंपनी के प्रमोटर्स प्रशांत बोथरा और विजय बोथरा, अन्य निदेशकों, ऑडिटर्स और संबंधित कॉर्पोरेट परिसरों में की गई।
चांडिल में पावर प्लांट लगाने के नाम पर लिया था कर्ज
ईडी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, कोहिनूर पावर ने झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल क्षेत्र में 66 मेगावाट क्षमता का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के लिए विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों से करीब 290 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। आरोप है कि कर्ज की रकम का इस्तेमाल निर्धारित पावर प्रोजेक्ट में करने के बजाय ग्रुप से जुड़ी अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया गया। जांच एजेंसी को आशंका है कि रकम का एक हिस्सा निजी संपत्तियां बनाने में भी लगाया गया।
कोयला आवंटन मामले से भी जुड़ा रहा है ग्रुप
कोहिनूर ग्रुप की चांडिल-जमशेदपुर क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां रही हैं। वर्ष 2005 में झारखंड सरकार के साथ एमओयू के बाद आदित्यपुर में ग्रुप का कार्यालय खोला गया था। बाद में मेदनिराई कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और गलत नेटवर्थ दर्शाने के मामले में सीबीआई ने भी प्राथमिकी दर्ज की थी।
ऑडिटर्स और सीए के ठिकानों पर भी तलाशी
ईडी ने वित्तीय दस्तावेजों, बैलेंस शीट और कथित लेन-देन की जांच के लिए कंपनी से जुड़े सीए और ऑडिटर्स के परिसरों को भी खंगाला। छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल फोन और संदिग्ध बैंक लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी अब बैंक से निकली रकम की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाने में जुटी है। साथ ही कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम से बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कुर्क करने की दिशा में भी कार्रवाई की जा सकती है

