
हजारीबाग : जिले में अब पर्व-त्योहारों और आयोजनों के नाम पर देर रात तक तेज आवाज में कानफोड़ू डीजे या लाउडस्पीकर बजाना भारी पड़ सकता है। आम लोगों की शांति और सेहत का ख्याल रखते हुए प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सदर अनुमंडल अधिकारी आदित्य पांडेय ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए जिले भर में रात 10:00 बजे से लेकर सुबह 06:00 बजे तक किसी भी तरह के लाउडस्पीकर, डीजे और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
अस्पतालों और छात्रों की राहत के लिए कड़ा फैसला
प्रशासनिक आदेश में कहा गया है कि त्योहारों और अन्य कार्यक्रमों के दौरान अक्सर देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाया जाता है। इससे न केवल सामान्य जनजीवन प्रभावित होता है, बल्कि अस्पताल में भर्ती मरीजों, पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों और बुजुर्गों को भारी मानसिक व शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके अलावा कोर्ट, स्कूल और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के कामकाज में भी बेवजह खलल पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिए ‘ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000’ को जिले में सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
लापरवाही पर होगी डीजे जब्ती
उन्होंने जिले के सभी थाना प्रभारियों और ओपी प्रभारियों को अपने-अपने इलाकों में कड़ी गश्त और निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। पुलिस को साफ कहा गया है कि अगर कोई भी आयोजक या साउंड ऑपरेटर रात 10 बजे के बाद तेज आवाज में डीजे बजाता पाया जाता है, तो उस पर किसी तरह की ढिलाई न बरती जाए। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और उनके डीजे या लाउडस्पीकर को मौके पर ही बंद कराकर जब्त कर लिया जाएगा।
प्रशासन की आम जनता से सहयोग की अपील
कार्रवाई की चेतावनी के साथ-साथ जिला प्रशासन ने आम नागरिकों, पूजा समितियों, मैरिज हॉल संचालकों और डीजे मालिकों से जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील भी की है। प्रशासन का कहना है कि खुशियां और त्योहार मनाना सभी का अधिकार है, लेकिन इससे दूसरों की शांति, स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। केवल विशेष परिस्थितियों में पूर्व अनुमति के साथ ही निर्धारित मानक आवाज में छूट मिल सकेगी, अन्यथा नियम तोड़ने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई तय है।

