
साहिबगंज: घर वो जगह होती है जहां इंसान खुद को सबसे सुरक्षित महसूस करता है, लेकिन जब अपने ही घर में जुल्म का दायरा बढ़ जाए, तो नन्हे कदम भी अनजान राहों पर निकल पड़ते हैं। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला मालदा रेल मंडल के बरहरवा रेलवे स्टेशन से सामने आया है, जहां आधी रात को भटक रहे दो मासूमों को आरपीएफ की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू किया।
शनिवार देर रात करीब दो बजे, जब पूरा शहर सो रहा था तब बरहरवा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर सन्नाटे के बीच दो 14 वर्षीय किशोर सहमे हुए खड़े थे। फुट ओवरब्रिज के पास संदेहास्पद स्थिति में घूम रहे इन बच्चों पर जब आरपीएफ की गश्ती टीम की नजर पड़ी, तो मामला उजागर हुआ। आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार की अगुवाई में एएसआई एके हांसदा, अनिल कुमार साह और बबलू कुमार ने तुरंत दोनों बच्चों को अपनी सुरक्षा में ले लिया।
जब आरपीएफ पोस्ट में ले जाकर उनसे प्यार से पूछताछ और काउंसलिंग की गई, तो पाकुड़ के रहने वाले एक बच्चे की आंखों से दर्द छलक पड़ा। उसने बताया कि उसकी सगी मां अब इस दुनिया में नहीं है। पिता नशे की लत में डूबे हैं। सौतेली मां का जुल्म दिन-ब-दिन बढ़ता चला गया। रोज-रोज के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर उसने घर छोड़ने का फैसला किया।
साथी भी बन गया था हमसफर
दोस्ती की मिसाल पेश करते हुए उसका दूसरा साथी भी उसके इस सफर में हमसफर बन गया। दोनों पाकुड़ से एक टोटो में सवार होकर बरहरवा स्टेशन पहुंचे थे और ट्रेन पकड़कर किसी अनजान शहर भाग जाने की फिराक में थे।
आरपीएफ ने बिना देर किए मामले की संवेदनशीलता को समझा और चाइल्ड हेल्पलाइन रेलवे (साहिबगंज) को सूचित किया। मौके पर पहुंचे हेल्पलाइन के प्रतिनिधि राधे श्याम और किरण कुमारी ने कागजी प्रक्रिया पूरी की। फिलहाल दोनों बच्चों को सुरक्षित संरक्षण, काउंसलिंग और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए साहिबगंज चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द कर दिया गया है।
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